भागवत कथा में पाप-पुण्य के फल और कर्मों का महत्व समझाया।

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बलदेव(मथुरा)। श्री दाऊजी कोल्ड स्टोरेज पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भागवत प्रवक्ता कपिलदेवाचार्य ने श्रद्धालुओं को पाप-पुण्य और भक्ति का महत्व बताया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

उन्होंने कहा कि मनुष्य द्वारा किए गए पाप और पुण्य का फल उसे इसी जीवन में प्राप्त होता है। व्यक्ति अपने कर्मों के माध्यम से ही सुख और दुख का अनुभव करता है।

उन्होंने कहा कि संसार में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य जीवन की तीन महत्वपूर्ण त्रिवेणी हैं, जिनसे सीख लेकर मनुष्य को आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जिस प्रकार उन्हें सात दिन में मृत्यु लोक जाने का श्राप मिला था, उसी प्रकार मनुष्य के कर्मों का हिसाब भी परमात्मा द्वारा इसी युग में किया जाता है।

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की भक्ति ही मनुष्य को पापों से मुक्ति दिलाने का सबसे बड़ा माध्यम है।

इस अवसर पर परीक्षित यतेंद्र पांडेय, रंजना शर्मा, श्री राधा कृष्ण सेवा मंडल के अध्यक्ष राकेश गोयल, अनीता गोयल,तुषार गोयल,नारायण गोयल, सुजीत वर्मा, जगदीश पाठक,शिव कुमार,दीपक सोनी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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