•डीएम ने ब्लास्टिंग सुरक्षा मानकों, अवैध खनन पर कार्रवाई और खनन के बाद भूमि पुनर्स्थापन पर दिए निर्देश।
रिपोर्ट : मनोज अग्रहरि।
मीरजापुर। जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार की अध्यक्षता में गुरुवार को जिला पंचायत सभागार में उपखनिजों के अवैध खनन एवं परिवहन, खनन क्षेत्रों में ब्लास्टिंग के सुरक्षा मानकों तथा खनन के बाद वृक्षारोपण एवं भूमि पुनर्स्थापन को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) एवं प्रभारी अधिकारी खनिज विनोद कुमार सिंह, उपजिलाधिकारी चुनार अनेग सिंह, मड़िहान के एसडीएम संतोष कुमार ओझा, लालगंज के एसडीएम अजीत कुमार, खान सुरक्षा निदेशालय वाराणसी के उप निदेशक, खान अधिकारी, वन विभाग के अधिकारी तथा जनपद के खनन पट्टाधारक मौजूद रहे।
बैठक में जिलाधिकारी ने बालू, मोरम, गिट्टी एवं बोल्डर के अवैध खनन, परिवहन और ओवरलोडिंग पर नियमित निगरानी रखते हुए दोषियों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश उपखनिज परिहार नियमावली-2021 एवं खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम-1957 के तहत कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी पट्टाधारक स्वीकृत खनन क्षेत्र से ही ई-एमएम-11 के माध्यम से उपखनिज का परिवहन करें तथा भंडारणकर्ता ई-फॉर्म-सी के माध्यम से ही परिवहन सुनिश्चित करें।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि खनन क्षेत्रों में ब्लास्टिंग केवल सक्षम विभाग से अनुमति प्राप्त करने के बाद प्रबंधक, फोरमैन और ब्लास्टर की निगरानी में ही कराई जाए। खनन कार्य 45 डिग्री के कोण पर किया जाए, जिससे भूस्खलन की संभावना कम रहे। साथ ही विस्फोटक सामग्री का सुरक्षित भंडारण एवं उपयोग खान सुरक्षा निदेशालय के मानकों के अनुरूप किया जाए।
उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में मानक के अनुसार बेंच बनाकर खनन किया जाए, किनारों पर ढीले पत्थर एकत्रित न किए जाएं तथा सभी श्रमिकों को हेलमेट, सुरक्षा जूते, डस्ट मास्क सहित आवश्यक पीपीई किट उपलब्ध कराई जाए। श्रमिकों को आधुनिक ब्लास्टिंग तकनीक एवं सुरक्षा उपायों का नियमित प्रशिक्षण देने तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सहयोग से उनके स्वास्थ्य परीक्षण कराने के भी निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि खनन के दौरान स्थल पर मौजूद वृक्षों को सुरक्षित रखा जाए तथा उन्हें किसी भी स्थिति में नुकसान न पहुंचाया जाए। उन्होंने प्रत्येक एकड़ खनन पट्टा क्षेत्र में कम से कम 200 फलदार एवं छायादार पौधे लगाने, उनकी सिंचाई एवं फेंसिंग कराने के निर्देश दिए। एक एकड़ से अधिक क्षेत्र होने पर प्रत्येक अतिरिक्त एकड़ के लिए भी 200 पौधे लगाने होंगे।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी संरक्षण के दृष्टिकोण से खनन कार्य पूरा होने के बाद भूमि का पुनर्स्थापन, मलबे का वैज्ञानिक निस्तारण एवं व्यापक वृक्षारोपण सुनिश्चित किया जाए।