सहजनवा। किसानों के खेतों तक पानी पहुँचाकर उनकी फसलों को लहलहाने के सरकार के दावों को सिंचाई विभाग के जिम्मेदार पलीता लगा रहे हैं। सरकार एक तरफ जहाँ नहरों का जाल बिछाने की बातें कर रही है, वहीं सहजनवा क्षेत्र में विभाग की मनमानी और लापरवाही के कारण पिछले नौ वर्षों से एक नहर का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।
स्थिति यह है कि कुछ दूरी तक खोदी गई नहर को नाराज किसानों ने मिट्टी से पाट दिया है, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने आज तक मौके पर जाकर सुध लेने की जहमत नहीं उठाई। इसके चलते क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है
2017 में शुरू हुआ था काम, मुआवजे के विवाद में फंसा पेंच
सूबे की सरकार ने किसानों को भरपूर पानी देने के लिए बखिरा कैनाल को सरयू कैनाल से जोड़ने की बड़ी व्यवस्था की थी। इसी कड़ी में वर्ष 2017 में ‘शाहपुर मुंडा कोडरा माइनर’ के निर्माण के लिए किसानों से जमीन अधिग्रहित कर खोदाई का काम शुरू किया गया था। करीब आठ किलोमीटर तक नहर का निर्माण कार्य पूरा कर इसे अंतिम छोर तक पहुँचा भी दिया गया, लेकिन जैसे ही काम मुंडा कोडरा गाँव में पहुँचा, वहाँ विवाद खड़ा हो गया।
ग्रामीणों और प्रभावित किसानों का आरोप है कि विभाग ने बिना मुआवजा दिए ही उनकी कीमती कृषि भूमि पर जबरन नहर की खोदाई शुरू कर दी। उचित मुआवजा न मिलने से नाराज किसानों ने साल 2018 में विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और विरोध स्वरूप करीब एक किलोमीटर तक खोदी जा चुकी नहर को वापस मिट्टी से पाट दिया। किसानों के इस उग्र विरोध के बाद सिंचाई विभाग बैकफुट पर आ गया और तब से लेकर आज तक काम पूरी तरह ठप पड़ा है।
तालाब तक पहुँचना था पानी, अधिकारी बेखबर
योजना के मुताबिक, इस माइनर नहर को मुंडा कोडरा गाँव से आगे बढ़कर महुआपार तेतरिया गाँव के तालाब में गिरना था, जिससे आसपास के दर्जनों गाँवों के सैकड़ों किसानों को सीधे सिंचाई की सुविधा मिलती। लेकिन पिछले आठ सालों से इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे सरकारी धन की बर्बादी तो हुई ही, साथ ही किसानों को भी इसका कोई लाभ नहीं मिल सका।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
इस गंभीर लापरवाही और लंबे समय से लंबित पड़े मामले को लेकर जब सरयू नहर कैनाल के अधिशाषी अभियंता वीरेंद्र पासवान से बात की गई, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला था। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें इस पूरे प्रकरण की जानकारी ही नहीं है।
हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया है कि वे जल्द ही इस मामले की फाइल और जमीनी हकीकत का पता लगाकर समस्या का समाधान कराएंगे। अब देखना यह है कि विभाग की नींद कब टूटती है और किसानों को उनके हक का पानी कब मिलता है।