•बंदरों को पकड़ने में वन विभाग पर लापरवाही का आरोप, जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग।
रिपोर्ट: राहुल मिश्रा।
मिश्रिख-सीतापुर। मिश्रिख नगर में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बंदरों के उत्पात से स्थानीय नागरिकों, स्कूली बच्चों और श्रद्धालुओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आए दिन बंदरों के हमले की आशंका के चलते नगरवासियों में भय का माहौल बना हुआ है। इस गंभीर समस्या को लेकर जिलाधिकारी से शिकायत कर बंदरों को पकड़वाकर सुरक्षित स्थान पर छुड़वाने की मांग की गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, नगर में बंदर न केवल घरों और सार्वजनिक स्थानों पर उत्पात मचा रहे हैं, बल्कि सरकारी एवं सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। बिजली के खंभों को हिलाने और क्षतिग्रस्त करने जैसी घटनाओं से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। वहीं, स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों पर बंदरों के हमला करने का खतरा भी बना हुआ है। नवरात्रि के दौरान धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं और सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों को विशेष रूप से परेशानी उठानी पड़ रही है।
नगरवासियों का कहना है कि बंदरों के बढ़ते आतंक के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। लोगों ने आरोप लगाया कि इस समस्या को लेकर कई बार वन विभाग के अधिकारियों को फोन के माध्यम से सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
वन विभाग के रवैये पर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, बंदरों को पकड़ने के संबंध में वन विभाग के अधिकारी अनिल यादव से संपर्क किया गया तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उनके पास बंदरों को पकड़ने के लिए इतना समय नहीं है। इस कथित बयान के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जब नगर में बंदरों के कारण लगातार खतरा बना हुआ है, तो संबंधित विभाग को जिम्मेदारी से कार्रवाई करनी चाहिए।
जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग
नगरवासियों ने जिलाधिकारी से मामले का संज्ञान लेते हुए वन विभाग की टीम को तत्काल भेजने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बंदरों को पकड़कर नियमानुसार सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए, ताकि स्कूली बच्चों, श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को राहत मिल सके। साथ ही, बंदरों के कारण बिजली के खंभों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाएं।
अब देखना यह है कि मिश्रिख नगर में बंदरों के बढ़ते आतंक को रोकने के लिए जिला प्रशासन और वन विभाग कब तक ठोस कार्रवाई करते हैं और नगरवासियों को इस समस्या से राहत मिल पाती है।


