•हरि प्रसाद कनौडिया और मां के भक्तों के सहयोग से सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक सेवा, नवमी पर पूड़ी-सब्जी और हलवे का प्रसाद।
रिपोर्ट: मनोज अग्रहरि
मिर्जापुर विंध्याचल। मां विंध्यवासिनी की पावन नगरी विंध्याचल में शारदीय नवरात्र के दौरान भक्ति और आस्था के साथ सेवा की अनूठी मिसाल भी देखने को मिल रही है। पिछले 25 वर्षों से फलाहार और प्रसाद वितरण के माध्यम से मां के भक्तों की सेवा में जुटे पंडित रतन मोहन मिश्र आज भी अपनी परंपरा को पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं। उनके संयोजन में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं को निःशुल्क प्रसाद वितरित किया जा रहा है।
पकरीतर स्थित शीतला मंदिर के सामने प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक प्रसाद वितरण किया जाता है। यह सेवा हरि प्रसाद कनौडिया (कोलकाता) और मां के अन्य भक्तों के सहयोग से संचालित हो रही है। कार्यक्रम के संयोजक पंडित रतन मोहन मिश्र स्वयं व्यवस्था संभालते हुए श्रद्धालुओं तक प्रसाद पहुंचाने में जुटे रहते हैं।
रतन मोहन मिश्र का सेवाभाव कोरोना काल के लॉकडाउन के दौरान भी चर्चा में रहा था। उस कठिन समय में जरूरतमंदों की सेवा के चलते उन्हें लॉकडाउन के हीरो के रूप में पहचान मिली थी। परिस्थितियां बदलने के बावजूद सेवा के प्रति उनका समर्पण आज भी कायम है। अपने यजमान हरि प्रसाद कनौडिया सहित मां के अन्य भक्तों के सहयोग से वह धार्मिक आयोजनों के साथ जनसेवा की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
पिछले 25 वर्षों से नवरात्र में फलाहार वितरण उनकी सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वहीं, नवरात्र की नवमी तिथि पर श्रद्धालुओं को पूड़ी, सब्जी और हलवे का प्रसाद वितरित किया जाता है।
इस आयोजन के माध्यम से मां के भक्तों की सेवा के साथ आपसी सहयोग, सामाजिक समरसता और मानवीय संवेदना का संदेश भी दिया जा रहा है। मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए दूर-दराज से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के बीच यह सेवा धार्मिक आस्था को जनकल्याण की भावना से जोड़ रही है।
इस सेवा भाव में उनके साथ पंडित शिव जी महराज के साथ साथ पूरा परिवार शामिल रहता है।


