•ठोस सोने की खुली बिक्री न करने की अपील, निर्मित जेवरों की बिक्री को बढ़ावा देने पर जोर।
के.के. मिश्रा, संवाददाता।
संत कबीर नगर। देशहित और आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारियों एवं व्यापारियों के साथ महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सोने के आयात को कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने तथा स्थानीय कारीगरों के रोजगार को सुरक्षित रखने पर विस्तार से चर्चा हुई।
वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया निर्णय
जिलाधिकारी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के आह्वान के अनुरूप वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए देशहित में बुलियन, 24 कैरेट गोल्ड एवं सोने के आयात को कम करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आभूषणों की बिक्री पर किसी प्रकार की रोक नहीं है और यह पहले की तरह जारी रहेगी, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि पुरानी ज्वैलरी की खरीद-बिक्री नियमानुसार किए जाने से व्यापार में पारदर्शिता आएगी और कारीगरों का कार्य भी सुरक्षित रहेगा।
व्यापारियों ने जताया सहयोग
बैठक में मौजूद सर्राफा व्यापार मंडल के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने कहा कि देशहित सर्वोपरि है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए वे प्रशासन का हर संभव सहयोग करेंगे। व्यापारियों ने आम जनता को बुलियन एवं गोल्ड बार की बिक्री न किए जाने का निर्णय भी लिया।
स्थानीय कारीगरों को मिलेगा लाभ
बैठक में यह भी तय किया गया कि ठोस सोने के बजाय निर्मित जेवरों की बिक्री को बढ़ावा दिया जाएगा। व्यापारियों का कहना था कि इससे स्थानीय स्वर्णकार कारीगरों, डिजाइनरों और छोटे व्यापारियों को रोजगार मिलेगा तथा बाजार की छवि भी बेहतर होगी।
प्रशासन ने सुरक्षा का दिया आश्वासन
पुरानी ज्वैलरी की खरीद-बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापारियों ने प्रशासनिक सुरक्षा और सहयोग की मांग की, जिस पर जिलाधिकारी ने पूर्ण सहयोग और सुरक्षा का आश्वासन दिया। व्यापारियों ने भी जिला एवं पुलिस प्रशासन को हर संभव सहयोग देने की बात कही।
बैठक में ये रहे उपस्थित
बैठक में राजेश कुमार पाण्डेय, उपायुक्त राज्य कर विनय कुमार गुप्ता, सहायक आयुक्त धम्म प्रिय सांकृत्यायन सहित सर्राफा व्यापार मंडल के महामंत्री श्यामसुन्दर वर्मा, रजनीश वर्मा, विनोद रुंगटा, सत्य प्रकाश वर्मा, मंगल वर्मा, त्रिलोकी नाथ वर्मा, राजेंद्र वर्मा, राजू वर्मा, रामदयाल वर्मा, राजेश कुमार वर्मा, अरविन्द वर्मा, हनुमान वर्मा, अनूप कुमार वर्मा, गोपाल जी वर्मा समेत बड़ी संख्या में व्यापारी एवं समिति सदस्य मौजूद रहे।
