आईटीआई मशीन खरीद घोटाले की आंच तेज: शिकायत के बाद सहायक निदेशक निलंबित, उच्चस्तरीय जांच शुरू।

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लखनऊ/बस्ती। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में मशीनों और उपकरणों की खरीदको लेकर उठे भ्रष्टाचार के आरोपों पर योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत और प्रारंभिक जांच में आरोप गंभीर पाए जाने के बाद प्रशिक्षण निदेशालय के सहायक निदेशक धीरेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। शासन ने उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करते हुए जांच अधिकारी भी नियुक्त कर दिया है।

मामले की शुरुआत हर्रैया विधायक अजय सिंह द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए एक पत्र से हुई, जिसमें प्रशिक्षण निदेशालय, लखनऊ में टूल और मशीनों की खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था। शिकायत में कहा गया था कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने कथित रूप से कंपनियों से मिलीभगत कर निविदा प्रक्रिया को प्रभावित किया और पात्रता के मानकों को दरकिनार कर कुछ फर्मों को लाभ पहुंचाया।

शिकायत के अनुसार तकनीकी समिति की आपत्तियों के बावजूद एक कंपनी को तकनीकी रूप से योग्य घोषित किया गया, जबकि अन्य पात्र फर्मों को मामूली आधार पर निविदा प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। विधायक ने आरोप लगाया था कि यह प्रक्रिया कई खरीद निविदाओं में दोहराई गई, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई। उन्होंने पिछले एक माह में हुई सभी निविदाओं और तकनीकी मूल्यांकन की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की थी।

उधर, शासन द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि धीरेंद्र कुमार के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों के परीक्षण में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। उन पर वित्तीय मामलों में भ्रष्टाचार, विभागीय कार्यों में लापरवाही, अधीनस्थ कर्मचारियों पर दबाव बनाने, स्थानांतरण से जुड़े मामलों में अनियमितता तथा जनपदीय अधिकारियों से बजट आवंटन के बदले कथित कमीशन मांगने जैसे आरोप लगाए गए हैं। शासन ने इसे सरकारी सेवक आचरण नियमावली का गंभीर उल्लंघन माना है।

प्रमुख सचिव, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग डॉ. हरिओम द्वारा जारी आदेश के अनुसार धीरेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हैं। संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार को जांच अधिकारी नामित किया गया है। जांच पूरी होने तक निलंबित अधिकारी को देवीपाटन मंडल से संबद्ध किया गया है।

इस कार्रवाई के बाद प्रशिक्षण निदेशालय में हुई मशीन एवं उपकरण खरीद की प्रक्रियाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई हैं। अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि खरीद प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप कितने सही हैं और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।

क्या हैं प्रमुख आरोप?

  • मशीन एवं उपकरण खरीद में अनियमितता।
  • टेंडर प्रक्रिया में कथित पक्षपात।
  • कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने का आरोप।
  • बजट आवंटन के बदले कमीशन मांगने की शिकायत।
  • कर्मचारियों पर दबाव और अनुशासनहीनता के आरोप।
  • वित्तीय कार्यों में कथित भ्रष्टाचार।

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