रिपोर्ट: विजय नागपाल।
मथुरा। गंभीर तीव्र नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस, सेप्टिक शॉक और कई जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे एक मरीज को अस्पताल के चिकित्सकों की बहुविषयक टीम ने नया जीवन दिया। मरीज को अत्यंत गंभीर अवस्था में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी कई अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो चुकी थी और जान को गंभीर खतरा था।
मरीज का उपचार डॉ. निशा जैन एवं गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी टीम के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर टीम तथा रेडियोलॉजी टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अस्पताल के कुलपति डॉ. मयंक गौतम ने पूरे उपचार के दौरान आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया।
मरीज की बिगड़ती हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल आपातकालीन सर्जरी की। ऑपरेशन के दौरान संक्रमित एवं मृत अग्नाशयी ऊतकों को हटाया गया, पेट के भीतर बने अवरोध को दूर किया गया तथा पोषण और संक्रमण नियंत्रण के लिए आवश्यक चिकित्सीय प्रक्रियाएं की गईं।
सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू में भर्ती कर गहन निगरानी में रखा गया। विशेषज्ञों की सतत देखरेख, एंटीबायोटिक उपचार और पोषण प्रबंधन के चलते मरीज की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ और वह खतरे से बाहर आ गया।
चिकित्सकों के अनुसार यह मामला समय पर निदान, त्वरित सर्जिकल हस्तक्षेप और विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से मरीज की जान बचाने का उत्कृष्ट उदाहरण है। अस्पताल प्रशासन ने इसे टीमवर्क और आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था की बड़ी सफलता बताया है।