•सीएम डैशबोर्ड समीक्षा बैठक में डीएम ने अधिकारियों को चेताया, शिकायतों के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर दिया जोर।
रिपोर्ट : विजय नागपाल।
मथुरा। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में सीएम डैशबोर्ड (राजस्व), कर एवं करेत्तर राजस्व, राजस्व प्रशासन, चकबंदी कार्यों, राजस्व वादों, आईजीआरएस संदर्भों तथा खाद्य सुरक्षा एवं खाद्य एवं रसद विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने उपायुक्त मनरेगा, जिला प्रोबेशन अधिकारी, परियोजना अधिकारी नेडा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), उप कृषि निदेशक, जिला समाज कल्याण अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, विद्युत, सिंचाई एवं जलकल नगर निगम के अधिशासी अभियंताओं सहित कई अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्पष्टीकरण (कारण बताओ नोटिस) जारी किया।
इसके अतिरिक्त एडीओ पंचायत नौहझील, चौमुंहा, मांट व बलदेव, अधिशासी अधिकारी गोवर्धन एवं राया, बाल विकास परियोजना अधिकारी नौहझील एवं छाता, उप जिलाधिकारी गोवर्धन तथा तहसीलदार महावन, मांट, गोवर्धन एवं सदर को भी अपने दायित्वों के प्रति उदासीनता और आईजीआरएस मामलों में अपेक्षित रुचि न लेने पर नोटिस जारी किए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण, निष्पक्ष एवं समयबद्ध निस्तारण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव तथा मंडलायुक्त स्तर से प्राप्त शिकायतों का संबंधित अधिकारी स्वयं संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शिकायतकर्ताओं की संतुष्टि सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि रिपोर्टों की समय से फीडिंग सुनिश्चित करें तथा प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक कार्यालय में उपस्थित रहकर जनसुनवाई करें।
बैठक में जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को फार्मर्स रजिस्ट्री के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही सीएम डैशबोर्ड पर विभिन्न विभागों की रैंकिंग में सुधार तथा विकास एवं निर्माण कार्यों को गति देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड शासन की प्राथमिकताओं की निगरानी का महत्वपूर्ण माध्यम है और किसी भी विभाग की खराब रैंकिंग जनपद की समग्र प्रगति को प्रभावित करती है।
राजस्व वादों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों एवं न्यायिक अधिकारियों को अधिवक्ताओं के साथ समन्वय स्थापित कर अधिकाधिक वादों का निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए तथा धारा 80, धारा 24, धारा 116 एवं धारा 34 से संबंधित प्रकरणों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी ने स्टांप, विद्युत, राज्य कर, परिवहन, रोडवेज, आबकारी, मंडी समिति, बांट-माप, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन तथा खनन विभाग को राजस्व वसूली के निर्धारित लक्ष्यों को शत-प्रतिशत पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।