श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर माखन-मिश्री भोग की मांग, राष्ट्रपति से मिलेंगे वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एपी सिंह।

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श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर नियमित पूजा-अर्चना, दीप प्रज्वलन और भोग व्यवस्था बहाल करने की उठाई मांग; गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने एवं सनातन धर्म बोर्ड गठन की भी वकालत

मथुरा। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एपी सिंह रविवार को दिनेश फलाहारी महाराज के साथ श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन-पूजन किए। इस दौरान उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।डॉ. एपी सिंह ने कहा कि श्रीकृष्ण की जन्मस्थली और कर्मस्थली सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र है।

उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से संबंधित मामला वर्तमान में उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के समर्थन में दिनेश फलाहारी महाराज लंबे समय से नंगे पैर रहकर तथा अन्न का त्याग कर तपस्या कर रहे हैं, जो उनके समर्पण और त्याग का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण को माखन और मिश्री अत्यंत प्रिय हैं तथा प्राचीन काल से उनके जन्मस्थान पर इस भोग की परंपरा रही है। उनका कहना था कि वर्तमान परिस्थितियों में भगवान को नियमित रूप से भोग नहीं लगाया जा पा रहा है और न ही श्रद्धालु प्रसाद अर्पित कर पा रहे हैं।

इस संबंध में उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय मांगा गया है और उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर मुलाकात का अवसर मिलेगा। राष्ट्रपति को एक प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर नियमित माखन-मिश्री भोग और पूजा-अर्चना की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की जाएगी।

डॉ. एपी सिंह ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया अपने स्तर पर चलती रहेगी और उन्हें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि न्यायालय में चल रहे मामले का शीघ्र समाधान होगा।

इस अवसर पर उन्होंने केंद्र सरकार से गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने, सनातन धर्म बोर्ड के गठन तथा मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में शराब, मांस, अंडा एवं अन्य तामसिक पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी की। उनका कहना था कि ऐसे पदार्थों की बिक्री से धार्मिक भावनाएं प्रभावित होती हैं और श्रद्धालुओं के बीच गलत संदेश जाता है।

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर नियमित रूप से सुबह-शाम दीप प्रज्वलन, पूजा-अर्चना और भोग की व्यवस्था सनातन परंपराओं के अनुरूप होनी चाहिए।इस अवसर पर दिनेश फलाहारी महाराज, साध्वी इंदुलेखा तथा सच्चिदानंद महाराज सहित अन्य श्रद्धालु एवं संतजन उपस्थित रहे।

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