रिपोर्ट: विजय नागपाल।
मथुरा। गांव यौरा स्थित श्री बाला जी मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को कथावाचिका अनुप्रिया किशोरी जी ने श्रद्धालुओं को ध्रुव चरित्र एवं भक्त प्रह्लाद की भक्ति का भावपूर्ण वर्णन सुनाया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथावाचिका अनुप्रिया किशोरी जी ने कहा कि भगवान की कथा का नियमित श्रवण करने से मन को शांति प्राप्त होती है और व्यक्ति का जीवन आध्यात्मिक मार्ग की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि मात्र पांच वर्ष की आयु में बालक ध्रुव अपनी माता के अपमान से व्यथित होकर भगवान की आराधना के लिए वन चले गए। मार्ग में महर्षि नारद ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन ध्रुव अपने संकल्प से विचलित नहीं हुए। नारद जी ने उन्हें मंत्र देकर तपस्या के लिए प्रेरित किया। उनकी कठोर साधना से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और अमर ध्रुव पद प्रदान किया।
उन्होंने भक्त प्रह्लाद की कथा का भी वर्णन करते हुए बताया कि भगवान ने अपने परम भक्त की रक्षा के लिए नृसिंह अवतार धारण कर हिरण्यकश्यप का वध किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ध्रुव ने बाल्यावस्था में ही भगवान की भक्ति से परम लक्ष्य प्राप्त किया, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को बचपन से ही ईश्वर भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए।
कथा का शुभारंभ मंदिर के महंत विजय जी तथा यजमान सावित्री देवी पत्नी जगपाल चौधरी द्वारा श्रीमद्भागवत की आरती के साथ किया गया।
आयोजन समिति के जयप्रकाश चौधरी ने बताया कि गांव यौरा, आंवला सुल्तानपुर स्थित श्री बाला जी मंदिर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 22 जून से 28 जून तक किया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की।
इस अवसर पर गांव के गणमान्य नागरिकों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।