सुल्तानपुर। पावन आदि गंगा गोमती मैया के तट पर बन रहे हनुमान घाट का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ कि उसकी गुणवत्ता पर सवालों का पहाड़ खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों के विकास कार्य में मजबूती की जगह पीली ईंटों का सहारा लिया जा रहा है। सवाल यह है कि घाट बन रहा है या फिर पहली ही बाढ़ में बह जाने की तैयारी की जा रही है।
लोगों का कहना है कि जिस घाट पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु स्नान, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करेंगे वहां यदि घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ तो यह केवल सरकारी धन की बर्बादी नहीं बल्कि लोगों की सुरक्षा से भी खिलवाड़ होगा।
लोगों का तंज है कि कहीं ऐसा न हो कि उद्घाटन की तस्वीरें चमकें और पहली बरसात में निर्माण की हकीकत भी सामने आ जाए। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि निर्माण में प्रयुक्त ईंट, सीमेंट और अन्य सामग्री की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि मानकों से समझौता या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कार्यदायी संस्था पर केवल नोटिस नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई भी होनी चाहिए।
जनता का कहना है कि धार्मिक आस्था के नाम पर यदि गुणवत्ता से समझौता किया गया तो यह आस्था के साथ-साथ जनता के भरोसे पर भी चोट होगी।
जब इस संबंध में नगर पालिका परिषद सुल्तानपुर के अधिशासी अधिकारी लालचंद्र सरोज से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है। उनके निर्देश पर सहायक अभियंता (एई) को तत्काल मौके पर भेजकर निर्माण कार्य और गुणवत्ता की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। अब देखना यह होगा कि जांच सिर्फ फाइलों का वजन बढ़ाती है या सचमुच जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय होती है। क्योंकि जनता पूछ रही है हनुमान घाट बनेगा मजबूत या फिर सरकारी निर्माणों की वही पुरानी कहानी दोहराई जाएगी जहां ईंटों से ज्यादा भरोसा जांच समितियों पर टिका रहता है।