प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कक्षा 12वीं (इंटरमीडिएट) की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी फैसला किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और केंद्रीय मूल्यांकन निकाय ‘परख’ की सिफारिशों के आधार पर यूपी बोर्ड ने अपने पुराने परीक्षा पैटर्न को पूरी तरह से बदल दिया है। नए नियमों के अनुसार, अब इंटरमीडिएट के सभी विषयों की लिखित परीक्षा एक समान यानी 80-80 अंकों की होगी। वहीं शेष 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन और प्रैक्टिकल के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस बदलाव को अगले शैक्षणिक सत्र से सबसे पहले कक्षा 11 में और उसके बाद बोर्ड परीक्षा 2027 के लिए कक्षा 12वीं में लागू करने की पूरी तैयारी है ।
अंक विभाजन में क्या हुए बदलाव?
अब तक यूपी बोर्ड में प्रायोगिक और गैर-प्रायोगिक विषयों के लिए अलग-अलग अंक व्यवस्था थी। लेकिन अब सीबीएसई की तर्ज पर सभी विषयों में 80:20 का एक समान फॉर्मूला लागू होगा । गैर-प्रायोगिक विषय जैसे- हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत आदि इन विषयों का लिखित पेपर पहले पूरे 100 अंकों का होता था। अब लिखित परीक्षा सिर्फ 80 अंकों की होगी और पहली बार इन विषयों में 20 अंकों का आंतरिक मूल्यांकन जोड़ा गया है।प्रायोगिक विषय जैसे- भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान आदि इन विषयों में पहले लिखित परीक्षा 70 अंकों की और प्रैक्टिकल 30 अंकों का होता था। नए पैटर्न के तहत अब थ्योरी (लिखित परीक्षा) को बढ़ाकर 80 अंक कर दिया गया है, जबकि प्रैक्टिकल के अंक 30 से घटाकर 20 अंक कर दिए गए हैं।
रटने की संस्कृति होगी खत्म, हर यूनिट से आएंगे सवाल
बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, इस नए परीक्षा ढांचे को लागू करने का मुख्य उद्देश्य छात्रों को रटकर पास होने की आदत से बचाना है। नए प्रारूप के तहत प्रश्नपत्रों का स्तर उन्नत किया जाएगा और सिलेबस की हर यूनिट से सवाल पूछना अनिवार्य होगा। इससे छात्रों को जेईई , नीट और सीयूईटी जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सीधा फायदा मिलेगा। कुल मिलाकर प्रत्येक विषय का मूल्यांकन पहले की तरह 100 अंकों का ही रहेगा, लेकिन अब अंकों को अर्जित करने का जरिया और परीक्षा का पूरा तरीका बदल गया है।


