
मथुरा। 11 यू.पी. बटालियन एनसीसी मथुरा द्वारा आयोजित सीएटीसी-48 ड्रोन प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता शिविर के छठे दिन कैडेट्स ने ड्रोन के अलग-अलग तकनीकी घटकों की पहचान करते हुए उन्हें सही क्रम में जोड़कर एक पूर्ण ड्रोन तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। ड्रोन को उड़ाना सीखने के साथ अब एनसीसी कैडेट्स उसके निर्माण और तकनीकी संरचना को भी समझ रहे हैं। शिविर का नेतृत्व कैंप कमांडेंट कर्नल विक्रांत त्यागी कर रहे हैं।
ट्रेनिंग ऑफिसर हुकम सिंह प्रजापति ने बताया कि कैडेट्स को ड्रोन तकनीक का व्यावहारिक एवं तकनीकी ज्ञान देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा कैडेट्स को ड्रोन के प्रत्येक भाग की पहचान, उसकी उपयोगिता तथा कार्यप्रणाली समझाते हुए अलग-अलग पुर्जों को जोड़कर ड्रोन तैयार करने की प्रक्रिया सिखाई जा रही है। इसके बाद तैयार ड्रोन को पुनः खोलकर उसके घटकों की जांच तथा तकनीकी खराबी की पहचान करने का अभ्यास भी कराया जा रहा है।
कैडेट्स को असेंबली, डिसअसेंबली और फॉल्ट फाइंडिंग की पूरी प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से समझाने के लिए विशेष ड्रोन विशेषज्ञों की टीम को प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित किया गया। विशेषज्ञ टीम में ड्रोन इंस्ट्रक्टर अनुज कुशवाह, ड्रोन पायलट अंजली यादव तथा ड्रोन पायलट प्राची शामिल हैं। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को एक-एक घटक को सही तरीके से जोड़ने, कनेक्शन की जांच करने, तकनीकी खराबी का कारण तलाशने तथा आवश्यक सुधार करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।प्रशिक्षण के साथ प्रतियोगिता आधारित चयन भी जारी है। कैडेट्स के तकनीकी ज्ञान, ड्रोन निर्माण, मरम्मत, संचालन एवं उड़ान कौशल का निरंतर मूल्यांकन किया जा रहा है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स का चयन कानपुर में होने वाले अगले प्रशिक्षण शिविर के लिए किया जाएगा, जहां उन्हें ड्रोन तकनीक का उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
प्रशिक्षण के दौरान कैंप एडजुटेंट कैप्टन गोविंद, ट्रेनिंग ऑफिसर हुकम सिंह प्रजापति, सूबेदार मेजर राजविंदर सिंह, जीसीआई गायत्री सोरोत तथा ट्रेनिंग जेसीओ तेजेंद्र बहादुर गुरंग उपस्थित रहे और कैडेट्स का मार्गदर्शन किया।
सीएटीसी-48 में कैडेट्स के हाथों में अब केवल ड्रोन का रिमोट नहीं, बल्कि तकनीक को समझने और उसे तैयार करने का कौशल भी है। अलग-अलग पुर्जों को जोड़कर ड्रोन बनाना, उसे खोलकर प्रत्येक भाग की जांच करना, खराबी तलाशना और उसे ठीक करना—यह प्रशिक्षण कैडेट्स को केवल ड्रोन संचालक नहीं, बल्कि भविष्य के दक्ष ड्रोन तकनीशियन और तकनीक-समझ रखने वाले युवा बनने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।


