•ग्रामीण ने महिला फॉरेस्टर पर मिलीभगत का आरोप लगाकर डीएम व एसडीएम से की शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग
रिपोर्ट: राहुल मिश्रा
मिश्रिख, सीतापुर। विकासखंड मिश्रिख की ग्राम पंचायत निरहनि क्षेत्र में बिना परमिट चार भारी-भरकम नीम के पेड़ों की कटान और उन्हें रातों-रात मौके से हटाए जाने का मामला सामने आया है। मामले को लेकर गांव निवासी राम भजन यादव पुत्र चंद्रिका ने उपजिलाधिकारी मिश्रिख और जिलाधिकारी सीतापुर को शिकायती पत्र देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि निरहनि-कुल्हुवा मार्ग के मध्य झाबर तालाब के पास संतोष यादव के खेत में खड़े चार नीम के पेड़ों को कथित रूप से बिना किसी वैध परमिट के लकड़ी कटारों द्वारा काट दिया गया। आरोप है कि पेड़ों की कटान के बाद उनकी लकड़ी भी रातों-रात मौके से हटा दी गई। इससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
राम भजन यादव के मुताबिक, उन्होंने मामले की जानकारी रेंजर सिकंदर सिंह से ली, जिस पर रेंजर ने मौके पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही। वहीं, शिकायतकर्ता का दावा है कि जब उन्होंने क्षेत्र में तैनात महिला फॉरेस्टर डिंपल शर्मा से इस संबंध में बात की तो उन्होंने कथित तौर पर बिना परमिट नीम के पेड़ों के कटान की बात स्वीकार की।
शिकायतकर्ता के अनुसार, महिला फॉरेस्टर की ओर से कथित तौर पर यह भी कहा गया कि ग्रामीण या शिकायतकर्ता जिलाधिकारी से लेकर शासन स्तर तक जहां चाहें, कार्रवाई कर सकते हैं। इस कथित बयान को लेकर ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पेड़ों का कटान वास्तव में बिना वैध परमिट के किया गया है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि वन विभाग की जानकारी अथवा अनुमति के बिना पेड़ों की कटान और लकड़ी की निकासी कैसे हुई।
शिकायतकर्ता राम भजन यादव ने डीएम और एसडीएम से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर अवैध कटान में शामिल लोगों के साथ-साथ यदि किसी वनकर्मी की लापरवाही अथवा मिलीभगत सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
अब देखना यह है कि वन विभाग मामले की मौके पर जांच कर क्या कार्रवाई करता है और बिना परमिट नीम के पेड़ों की कटान के आरोपों की जांच में वास्तविकता क्या सामने आती है।


