•आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर 500 रुपये तक वसूले जाने का दावा, जांच की मांग।
रिपोर्ट: राहुल मिश्रा।
मिश्रिख (सीतापुर)। तहसील परिसर में संचालित जनसुविधा केंद्रों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ केंद्रों पर आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर लोगों से निर्धारित शुल्क से अधिक, 500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। वहीं, कुछ केंद्रों के पंजीकरण को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि जनसुविधा केंद्रों के माध्यम से भोली-भाली जनता से मनमानी वसूली की जा रही है। इससे सरकारी सेवाओं का लाभ लेने तहसील पहुंचने वाले लोगों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदेश सरकार जहां भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और पारदर्शी व्यवस्था कायम करने पर जोर दे रही है, वहीं तहसील परिसर में जनसुविधा केंद्रों की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल प्रशासनिक निगरानी पर भी प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
आरोप है कि उपजिलाधिकारी दीपक गुप्ता की ओर से इन केंद्रों का नियमित निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। ऐसे में मांग उठ रही है कि तहसील परिसर में संचालित सभी जनसुविधा केंद्रों के पंजीकरण, निर्धारित शुल्क और कामकाज की जांच कराई जाए।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और नियमों के विरुद्ध संचालित पाए जाने वाले केंद्रों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।


