मरीजों को मच्छरों के बीच रात गुजारने की मजबूरी, स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर उठे सवाल।
रिपोर्ट: राहुल मिश्रा।
मिश्रिख (सीतापुर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिश्रिख की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल परिसर में गंदगी, मच्छरों के प्रकोप और ऑक्सीजन प्लांट खराब होने की शिकायतों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि अस्पताल में साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय स्तर पर आरोप है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों को रात के समय मच्छरों के बीच रहना पड़ता है। परिसर में जगह-जगह कूड़ा जमा होने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि नगर पालिका की ओर से नियमित रूप से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है।
तीन साल से ऑक्सीजन प्लांट खराब होने का दावा
मीडिया कवरेज के दौरान अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट खराब होने की बात सामने आई। दावा किया गया कि प्लांट पिछले तीन वर्षों से बंद पड़ा है, लेकिन इसे ठीक कराने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। यदि यह स्थिति सही है, तो मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अस्पताल में कथित तौर पर दलालों और झोलाछाप चिकित्सकों की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। अस्पताल अधीक्षक प्रखर श्रीवास्तव की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बजट उपलब्ध कराती है, लेकिन अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं और साफ-सफाई की स्थिति को लेकर उठ रही शिकायतें व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करती हैं।
जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर जिलाधिकारी से मांग की गई है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का स्थलीय निरीक्षण कराकर साफ-सफाई, ऑक्सीजन प्लांट की स्थिति और मरीजों को मिल रही सुविधाओं की जांच कराई जाए। साथ ही, अनियमितताएं मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाते हैं।


