रिपोर्ट: अरुण कुमार
बस्ती। मौसम की लगातार बदलती करवट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल पर बर्बादी का खतरा मंडराने लगा है। समय से कटाई नहीं हो पाने और बारिश की आशंका के चलते किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं।
किसानों की जिंदगी भी किसी परीक्षा से कम नहीं है। सालभर खून-पसीना बहाकर फसल तैयार करने वाला अन्नदाता कभी बाढ़, कभी सूखा, कभी आग तो कभी बेमौसम बारिश की मार झेलने को मजबूर है। इस बार भी मौसम की बेरुखी ने किसानों की उम्मीदों पर संकट खड़ा कर दिया है।
धान की फसल तैयार होने के बावजूद खेतों में खड़ी है। किसानों को डर है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। खेती में खाद, बीज, डीजल, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च की गई पूंजी भी दांव पर लगी है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि पूरे साल की मेहनत के बाद जब फसल घर पहुंचने का समय आया है, तब मौसम साथ देने को तैयार नहीं है। ऐसे में किसानों की आर्थिक गणित बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है।


