रिपोर्ट: विजय नागपाल।
मथुरा/प्रयागराज। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से ईदगाह मस्जिद हटाने संबंधी प्रकरण में प्रयागराज हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज के अनुसार, सभी वादों में पूर्व में दाखिल प्रार्थना-पत्रों पर आपत्तियां एवं अनापत्तियां ली गईं तथा वाद से संबंधित बिंदु तय किए गए। इस दौरान हिंदू और मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ताओं ने न्यायालय के समक्ष अपना-अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है।
बताया गया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह प्रकरण से संबंधित 18 वाद न्यायालय में विचाराधीन हैं। हिंदू पक्ष का कहना है कि मंदिर की भूमि हिंदू मंदिर को वापस मिलनी चाहिए, जबकि मुस्लिम पक्ष वर्ष 1968 में हुए समझौते के आधार पर ईदगाह के कब्जे वाली करीब 2.25 एकड़ भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने की मांग करता है।
फलाहारी महाराज के अनुसार, ईदगाह मस्जिद कमेटी और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा समिति के बीच वर्ष 1968 में समझौता हुआ था, जिसके तहत मंदिर और मस्जिद की भूमि में परिवर्तन न करने तथा जो जहां है, उसे वहीं रखने की बात कही गई थी। हिंदू पक्ष का आरोप है कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा समिति को मंदिर की संपत्ति के हस्तांतरण अथवा उसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं था। उनके मुताबिक समिति का गठन प्रसाद वितरण और रखरखाव जैसी व्यवस्थाओं के लिए किया गया था।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि ईदगाह परिसर में बिजली का अनधिकृत उपयोग किया जा रहा था। इसकी शिकायत उत्तर प्रदेश सरकार से किए जाने के बाद बिजली विभाग द्वारा ईदगाह मस्जिद कमेटी पर तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने का दावा किया गया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ए.पी. सिंह दिल्ली से ऑनलाइन जुड़े। इसके अलावा अधिवक्ता ए.के. मालवीय, वीनू सिंह, गौरव पांडे, सुषमा सोनी और तनवीर अहमद सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।


