मुरादाबाद। संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना का पावन पर्व अहोई अष्टमी ग्रामीण क्षेत्र बहेड़ी ब्रह्मनान, हिमाँयुपुर, धारकनंगला, डिलारी, कालाझांडा नगरीय क्षेत्र ठाकुरद्वारा, भोजपुर एवं महानगर में पूरी श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया।

मातृत्व के असीम वात्सल्य और स्नेह से जुड़े इस व्रत को लेकर माताओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। माताओं ने अपनी संतानों के सुखी जीवन के लिए कठिन निर्जला व्रत रखा। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम के समय घरों में विशेष रूप से दीवार पर गेरू एवं चित्र के माध्यम से मां अहोई और ग्यार माता स्याउ की पूजा का विधान पूरा किया गया। महिलाओं ने रोली, चावल, दूध और अहोई के भोग भाटे से मां की पूजा-अर्चना की और कथा श्रवण की।
संध्या ढलते ही महिलाओं को आकाश में तारों के उदय होने का बेसब्री से इंतजार रहा। जैसे ही तारे नजर आए, माताओं ने अपनी संतानों को स्वच्छ परिधान पहनाकर रौली, कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाकर एवं मीठा प्रसाद खिलाकर स्नेहिल आशिर्वाद दिया और चलनी से तारों को देखकर अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद जल ग्रहण कर अपना निर्जला व्रत खोला।
घरों में पारंपरिक पकवानों की महक और परिवार में बच्चों के प्रति दुलार ने इस त्यौहार के माहौल को और भी खास बना दिया। जगह-जगह बुजुर्ग महिलाओं ने व्रती महिलाओं को आशीर्वाद दिया, जिससे मातृत्व और स्नेह का यह पर्व आपसी आत्मीयता के साथ संपन्न हुआ।


