लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदेश के चिकित्सकों के नाम खुला पत्र लिखकर मरीजों की सुविधा के लिए चिकित्सा संवाद को सरल बनाने की अपील की है। उन्होंने डॉक्टरों से मरीजों से उनकी मातृभाषा या स्थानीय भाषा में बातचीत करने के साथ-साथ दवाओं और जांचों के नाम पर्चे पर हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखने का आग्रह किया है।
मरीजों को अपनी भाषा में समझाएं बीमारी और इलाज
ब्रजेश पाठक ने कहा कि जब डॉक्टर मरीज से उसकी अपनी भाषा में बातचीत करेंगे तो मरीज अपनी समस्या को बेहतर तरीके से बता सकेगा और डॉक्टर की सलाह भी आसानी से समझ सकेगा। उन्होंने अवधी, भोजपुरी, ब्रजभाषा जैसी स्थानीय भाषाओं में मरीजों से संवाद करने पर भी जोर दिया।
पर्चे पर हिंदी में लिखें दवा और जांच के नाम
स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सकों से आग्रह किया कि मरीजों के पर्चे पर दवाओं और मेडिकल जांचों के नाम हिंदी या देवनागरी लिपि में भी लिखे जाएं। उनका कहना है कि इससे मरीज और उसके परिजन आसानी से समझ सकेंगे कि कौन सी दवा दी गई है और कौन सी जांच करानी है। उन्होंने हिंदी में लिखने वाले डॉक्टरों को सम्मानित करने की बात भी कही है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर पत्र
यह पत्र पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर जारी किया गया। पत्र की शुरुआत “राष्ट्र नायकों की अभिलाषा, चले देश में देशज भाषा” संदेश से की गई। ब्रजेश पाठक ने भारतीय भाषाओं, विशेष रूप से हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लेने की बात कही।
उन्होंने अपने पत्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि आम जनता से जुड़ी व्यवस्थाओं में देशज भाषाओं का इस्तेमाल बढ़ाया जाना चाहिए।
चिकित्सा व्यवस्था में भाषा को बनाया जाए आसान
ब्रजेश पाठक ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में भाषा जितनी सरल होगी, मरीज के लिए बीमारी और उपचार को समझना उतना ही आसान होगा। उन्होंने डॉक्टरों से इस पहल को मरीजों की सुविधा और जनसेवा का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विदेशों में हिंदी और भारतीय भाषाओं में संवाद किए जाने का भी उल्लेख किया और डॉक्टरों से भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की अपील की।


