लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है और चुनावों में बेईमानी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जिस तरह काम कर रहा है, उससे लोकतंत्र की निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को लेकर जिस तरह की बातें सामने आ रही हैं, वे लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर और चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और भविष्य के चुनाव मौजूदा व्यवस्था के तहत नहीं होने चाहिए।
बुधवार को समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों द्वारा पिछले दस महीनों में कथित तौर पर 14 बार आपत्ति दर्ज किए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। मीडिया रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की बात कही गई है।
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर किसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के सदस्यों को न्यायपूर्ण तरीके से काम करने की स्वतंत्रता नहीं है और उनकी आपत्तियों की सुनवाई नहीं होती है तो यह लोकतंत्र के लिए घातक स्थिति है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता यह उम्मीद करती है कि चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था के रूप में लोकतंत्र को मजबूत करेगा, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। हालांकि, निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ विषयों पर टिप्पणियां जरूर की थीं, लेकिन उन्हें औपचारिक असहमति नहीं माना गया और संबंधित निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी समाजवादी पार्टी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद सपा ने आरोप लगाया था कि पार्टी समर्थक मतदाताओं के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से हटाए गए।
उन्होंने दावा किया कि पार्टी की ओर से चुनाव आयोग को बड़ी संख्या में मतदाताओं के शपथपत्र और संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई, लेकिन किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उत्तर प्रदेश में मीरापुर, कुंदरकी, कानपुर, करहल, कटेहरी और मिल्कीपुर उपचुनावों को लेकर भी सपा ने धांधली के आरोप लगाए थे।
अखिलेश यादव ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान गड़बड़ी की गई और लखनऊ में कथित तौर पर एक व्यक्ति के हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने सुल्तानपुर का उल्लेख करते हुए भी आरोप लगाया कि ऐसे व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल किया गया जो हस्ताक्षर करने में सक्षम नहीं है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उन्होंने अपने बयान में प्रस्तुत नहीं की।उन्होंने कहा कि अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल सामने आ चुके हैं और यह स्पष्ट होना चाहिए कि संवैधानिक संस्था के फैसले किस तरह लिए जा रहे हैं।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के खिलाफ साजिश की गई और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भी इसी तरह की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की तैनाती और स्थानांतरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं तथा चुनाव से पहले अधिकारी बदले जा रहे हैं।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर स्थानांतरण और तैनाती की जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का अगला विधानसभा चुनाव लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
उनके अनुसार यदि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता नहीं रही तो जनता के मताधिकार पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए जनता को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करना होगा और पीडीए की सरकार बनाने की बात कही।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों से भाजपा सरकार भी कठघरे में है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जनता अपने वोट के माध्यम से भाजपा को जवाब देगी और भाजपा के खिलाफ जनमत तैयार होगा।


