रिपोर्ट: विजय नागपाल।
मथुरा। जनपद मथुरा के विकासखंड राया स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय शेरनी (कक्षा 1 से 8) के सहायक अध्यापक करनपाल सिंह ने हैदराबाद स्थित केंद्रीय सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (CCRT) में 1 अक्टूबर से 16 अक्टूबर 2026 तक आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग कर जनपद का गौरव बढ़ाया।
इस प्रशिक्षण में आगरा मंडल से एकमात्र शिक्षक के रूप में शामिल होकर उन्होंने न केवल कला-आधारित शिक्षण की नवीन विधियों का प्रशिक्षण प्राप्त किया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश के शैक्षिक नवाचारों और SCERT उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित ‘उद्गम पोर्टल’ के बारे में भी विस्तार से जानकारी साझा की।
प्रशिक्षण के दौरान करनपाल सिंह ने विभिन्न राज्यों से आए शिक्षकों एवं प्रतिभागियों के समक्ष उद्गम पोर्टल की कार्यप्रणाली, इसके उद्देश्यों तथा शिक्षकों के लिए इसकी उपयोगिता को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से शिक्षक अपने विद्यालयों में किए गए नवाचारों, प्रभावी शिक्षण विधियों और उत्कृष्ट शैक्षिक गतिविधियों को साझा कर सकते हैं।
साथ ही, दूसरे शिक्षकों द्वारा अपनाए गए सफल नवाचारों से प्रेरणा लेकर उन्हें अपने विद्यालयों में लागू कर सकते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की भावना के अनुरूप आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कला, संस्कृति, कठपुतली, कहानी-कथन एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा को आनंददायी, प्रभावी और बाल-केंद्रित बनाना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान करनपाल सिंह ने कठपुतली कला (पपेट्री), थिएटर, माइम एवं मूवमेंट, कहानी-कथन, आवाज में उतार-चढ़ाव, वेंट्रिलोक्विज्म तथा टॉकिंग रॉड पपेट्स के निर्माण एवं संचालन जैसी विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। विशेषज्ञों ने बताया कि इन विधाओं के प्रयोग से बच्चों की कल्पनाशीलता, संवाद कौशल, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और कक्षा में सहभागिता को बढ़ाया जा सकता है।
प्रशिक्षण में पारंपरिक एवं समकालीन कठपुतली प्रस्तुतियों के साथ यह भी समझाया गया कि किस प्रकार पाठ योजनाओं में स्थानीय कला, संगीत, लय, तुकबंदी और कहानी-कथन को शामिल कर कठिन विषयों को सरल एवं रुचिकर बनाया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त, हैदराबाद के शिल्पग्राम शिल्पारामम के शैक्षिक भ्रमण के माध्यम से तेलंगाना की लोक संस्कृति, पारंपरिक शिल्प और ग्रामीण जीवन की विविधताओं को जानने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित क्षेत्रीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में करनपाल सिंह ने उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और कला की विशेषताओं को प्रस्तुत किया। यह सहभागिता एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को साकार करने तथा विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विविधता को समझने का महत्वपूर्ण अवसर बनी।
करनपाल सिंह शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार एवं गतिविधि आधारित शिक्षण के लिए भी प्रयासरत हैं। वे अपने विद्यालय में बच्चों के लिए शिक्षण को अधिक रोचक, व्यावहारिक और अनुभवात्मक बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। इस प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभवों को विद्यालय में लागू कर विद्यार्थियों के सीखने के स्तर और कक्षा में सहभागिता को बेहतर बनाने की योजना है।
उन्होंने बताया कि कठपुतली और कहानी-कथन जैसी कलाएं बच्चों को सीखने की प्रक्रिया से भावनात्मक रूप से जोड़ती हैं। इनके माध्यम से बच्चे बिना किसी भय के अपनी बात कहना, कल्पना करना, प्रश्न पूछना और समूह में कार्य करना सीख सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशिक्षण में प्राप्त तकनीकें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विद्यालय में आनंददायी एवं रचनात्मक वातावरण विकसित करने में उपयोगी सिद्ध होंगी।
करनपाल सिंह अपने विद्यालय में भी शिक्षण को रुचिकर, गतिविधि-आधारित और तकनीक-संपन्न बनाने के लिए विभिन्न नवाचार करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि CCRT प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभवों को विद्यालय में लागू करने के साथ-साथ अन्य शिक्षकों तक भी पहुंचाने का प्रयास करेंगे। उनका मानना है कि कला-आधारित शिक्षण और नवाचारों के आदान-प्रदान से बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक आनंददायी, प्रभावी और अर्थपूर्ण बन सकती है। आगरा मंडल से एकमात्र शिक्षक के रूप में राष्ट्रीय स्तर के इस प्रशिक्षण में सहभागिता और उत्तर प्रदेश के उद्गम पोर्टल की उपयोगिता को देशभर के प्रतिभागियों के सामने प्रस्तुत करना मथुरा जनपद के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। इससे प्रदेश में विकसित शैक्षिक नवाचारों को व्यापक पहचान दिलाने और शिक्षकों के बीच सहयोग एवं ज्ञान-साझाकरण को बढ़ावा देने की दिशा में सकारात्मक पहल हुई है।


