नवरात्र के दूसरे दिन होती है पूजा-अर्चना, श्रद्धापूर्वक आराधना से मिलती है आत्मबल और धैर्य की प्रेरणा
कुदरहा। शारदीय नवरात्र की शुरुआत रविवार से हो गई। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की और कलश स्थापना कर सुख-समृद्धि की कामना की। सोमवार को नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, संयम, शांति और पवित्रता की प्रतीक हैं। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित रहता है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से उनकी आराधना करने से भक्तों को धैर्य, आत्मबल और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।
भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए की कठोर तपस्या
श्रीराम जानकी मंदिर कुदरहा के महंत संतराम दास ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी माता पार्वती का दूसरा स्वरूप हैं। उनका जन्म राजा हिमालय के घर पुत्री के रूप में हुआ था। भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए उन्होंने कठोर तपस्या और साधना की थी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद वे अपने संकल्प से विचलित नहीं हुईं। उनकी तपस्या, त्याग और अटूट निष्ठा के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया।
महंत ने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भक्तों को अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए दृढ़ संकल्प और धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है। उनका स्वरूप जीवन में संयम, साधना और कठिन परिश्रम के महत्व का संदेश देता है।
इस विधि से करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
नवरात्र के दूसरे दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की साफ-सफाई कर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान कर उन्हें अक्षत, रोली, चंदन, पुष्प, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर माता की आराधना करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार, मां को चीनी और मिश्री का भोग लगाया जाता है। पूजा के अंत में मंत्र जाप, कथा पाठ और आरती करें।
मां ब्रह्मचारिणी के प्रमुख मंत्र
1. ब्रह्मचारिणी मंत्र
ब्रह्मचारयितुं शीलं यस्याः सा ब्रह्मचारिणी।
सच्चिदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोऽस्तुते॥
2. देवी प्रार्थना मंत्र
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
3. दुर्गा सप्तशती का देवी मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
4. बीज मंत्र
ॐ ह्रीं श्री अम्बिकायै नमः।
महंत संतराम दास ने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी का जीवन दृढ़ इच्छाशक्ति, संयम और साधना का प्रतीक है। उनकी आराधना से भक्तों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।


