•चार दिनों में 4,000 मेगावाट बढ़ी बिजली उपलब्धता, त्योहारों से पहले 2,400 मेगावाट और बढ़ाने की तैयारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले कई दिनों से रात के समय चल रहे बिजली संकट से अब राहत मिलती दिखाई दे रही है। बीते चार दिनों में करीब 4,000 मेगावाट बिजली की उपलब्धता बढ़ने के बाद प्रदेश में सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक बिजली कटौती से मुक्त आपूर्ति की जा रही है। रात में भी अब आधे घंटे से कम रोस्टिंग की स्थिति रह गई है। पावर कारपोरेशन प्रबंधन अगले 10 दिनों में करीब 2,400 मेगावाट और बिजली उपलब्ध कराने की तैयारी में जुटा है, ताकि त्योहारों के दौरान प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति दी जा सके।
चार दिनों में बढ़ी 4,000 मेगावाट उपलब्धता
बिजली संकट को देखते हुए पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने बंद तापीय इकाइयों को जल्द चालू कराने के लिए एक परियोजना से दूसरी परियोजना तक कोयला भेजने की व्यवस्था की। साथ ही तकनीकी खराबियों को तेजी से दूर कर 10 से अधिक इकाइयों को चालू कराया गया। इसके परिणामस्वरूप पिछले चार दिनों में करीब 4,000 मेगावाट बिजली की उपलब्धता बढ़ी है।
तापीय परियोजनाओं से बढ़ी उपलब्धता, बैंकिंग के जरिए मिले 2,400 मेगावाट और सोलर पावर के कारण अब सुबह छह से शाम छह बजे तक प्रदेश में बिजली कटौती नहीं की जा रही है। हालांकि, पावर एक्सचेंज से पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं होने के कारण रात में करीब आधे घंटे की रोस्टिंग करनी पड़ रही है।
27 हजार मेगावाट से अधिक हुई आपूर्ति
अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल के अनुसार शुक्रवार को प्रदेश में 27 हजार मेगावाट से अधिक बिजली की आपूर्ति की गई। गांवों में औसतन 21.42 घंटे और अन्य क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति की गई।
कई नई इकाइयों से बढ़ेगी बिजली उपलब्धता
रोजा परियोजना से 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन सोमवार से शुरू होने की उम्मीद है। इसके अलावा मेजा की 660 मेगावाट, हरदुआगंज की 250 मेगावाट तथा ओबरा की 660-660 मेगावाट क्षमता वाली दो इकाइयों के भी पहली अक्टूबर तक चालू होने की संभावना है। इनके शुरू होने से प्रदेश में बिजली की उपलब्धता और बढ़ेगी तथा त्योहारों के दौरान आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

