वृन्दावन। परिक्रमा मार्ग/चामुण्डा मोड़ स्थित श्रीशेष नारायण मन्दिर (आनन्द धाम) में शरद पूर्णिमा महामहोत्सव अत्यन्त श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ सन्तों,विद्वानों एवं धर्माचार्यों के पावन सानिध्य में मनाया गया।जिसके अंतर्गत वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य श्रीरामार्चन पूजन एवं वृहद भंडारा आदि के कार्यक्रम सम्पन्न हुए।
इस अवसर पर आयोजित संत-विद्वत सम्मेलन में अपने विचार व्यक्त करते हुए श्रीशेष नारायण मन्दिर (आनन्द धाम) के संस्थापक श्रीमद् जगद्गुरु विष्णुस्वामी विजयराम देवाचार्य भैयाजी महाराज (बल्लभगढ़ वाले) ने कहा कि शरद पूर्णिमा ऋतु परिवर्तन से जुड़ा एक मनोहारी व पुरातन लोक पर्व है।यह धार्मिक पर्व होने के साथ-साथ स्वास्थ्य संवर्धन का भी पर्व है। क्योंकि इस दिन चंद्रमा से जो अमृततुल्य किरणें ज्योत्स्ना के माध्यम से पृथ्वी पर गिरती हैं,वे औषधि तुल्य हुआ करती हैं।
पश्चिम पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी वैदेही वल्लभ देवाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में भी यह स्पष्ट रूप से कहा है कि ‘मैं ही रस स्वरूप अमृतमय चंद्रमा होकर सम्पूर्ण औषधियों व वनस्पतियों को पुष्ट करता हूं।’ भगवान श्रीकृष्ण का यह कथन शरद पूर्णिमा की उपादेयता को सिद्ध करता है विभिन्न प्राचीन ग्रंथों में चंद्रमा को “औषधीश” अर्थात औषधियों का स्वामी कहा गया है।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुराणाचार्य डॉ. मनोज मोहन शास्त्री ने कहा कि शरद पूर्णिमा के ही दिन “गोपी गीत” का उद्भव हुआ था।इसके अलावा देवी पार्वती व आदिदेव महादेव के पुत्र कार्तिकेय का जन्म भी शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था।शरद पूर्णिमा श्रीराम कथा के आदि सर्जक महर्षि वाल्मीकि का अवतरण दिवस भी है।आज ही के दिन भक्ति की पराकाष्ठा मानी जाने वाली श्रीकृष्ण समर्पित मीरा बाई का जन्म हुआ था।शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्र दर्शन करने वाले व्यक्ति पर श्रीकृष्ण की कृपा सदैव बनी रहती है।
महोत्सव में कलाधारी बगीची आश्रम के महंत जयराम दास महाराज, गोरे दाऊजी आश्रम के महंत प्रह्लाद दास महाराज,
पीपाद्वाराचार्य जगद्गुरु बाबा बलरामदास देवाचार्य महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. आदित्यानंद गिरि महाराज,
महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. नवल गिरि महाराज, महामंडलेश्वर साध्वी राधिका साधिका पुरी (जटा वाली मां), महामंडलेश्वर स्वामी सुरेशानंद परमहंस महाराज, महंत परशुराम दास महाराज, महंत दशरथ दास महाराज, महंत जगन्नाथ दास शास्त्री, महंत हरिशंकर दास नागा, महंत श्याम दास महाराज, महंत भरत दास महाराज, पण्डित अशोक व्यास रामायणी महाराज, आचार्य विपिन बापू महाराज, मुकेश मोहन शास्त्री, आचार्य बुद्धि प्रकाश शास्त्री, डॉ. राधाकांत शर्मा, आचार्य वागीश नन्दन महाराज आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
महोत्सव का समापन सन्त, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा एवं वृहद भंडारे के साथ हुआ।जिसमें सैकड़ों व्यक्तियों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।


