हाईकोर्ट के निर्देश पर बीएसए रतन कीर्ति ने जारी किया आदेश, फर्जी दस्तावेज मिलने पर नियुक्ति निरस्त करने के साथ हो सकती है कानूनी कार्रवाई
मथुरा। जनपद के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षकों के शैक्षिक एवं प्रशिक्षण संबंधी अभिलेखों का सत्यापन कराया जाएगा। इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रतन कीर्ति ने आदेश जारी कर सभी शिक्षकों को अपने शैक्षिक प्रमाण-पत्रों और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की स्वप्रमाणित छायाप्रतियां निर्धारित समय सीमा के भीतर जमा करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिका संख्या 11906/2026, कुसुमलता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य में 16 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में की जा रही है।
बीएसए की ओर से 31 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार जनपद के समस्त परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कम्पोजिट विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के शैक्षिक और प्रशिक्षण संबंधी अभिलेखों की जांच की जाएगी। इसके तहत शिक्षकों को हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक, बीएड, बीटीसी, डीएलएड, टीईटी, सीटीईटी सहित नियुक्ति एवं पदोन्नति के समय प्रस्तुत किए गए अन्य अर्हकारी प्रमाण-पत्रों की स्पष्ट एवं स्वप्रमाणित छायाप्रतियां जमा करनी होंगी।
निकट संबंधियों की जानकारी भी देनी होगी
आदेश में शिक्षकों के लिए नोटरी से सत्यापित शपथ-पत्र देना भी अनिवार्य किया गया है। इसमें उन्हें स्पष्ट करना होगा कि शिक्षा विभाग में बीएसए अथवा उससे उच्च पद पर उनका कोई निकट संबंधी कार्यरत या सेवानिवृत्त नहीं है। यदि ऐसा कोई संबंधी है तो उसकी जानकारी शपथ-पत्र में स्पष्ट रूप से देनी होगी। इसमें पति-पत्नी, माता-पिता, पुत्र-पुत्री, दामाद, पुत्रवधू, सास-ससुर, साला-बहनोई, साली-ननद तथा प्रथम श्रेणी के चचेरे, ममेरे एवं फुफेरे भाई-बहन सहित अन्य निर्धारित संबंधियों का विवरण शामिल होगा।
तीन नवंबर तक जमा करने होंगे अभिलेख
बीएसए ने सभी शिक्षकों को निर्देश दिया है कि वे अपने समस्त शैक्षिक एवं प्रशिक्षण प्रमाण-पत्रों की छायाप्रतियां और नोटरी सत्यापित शपथ-पत्र 3 नवंबर 2026 तक संबंधित विकासखंड के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा कर दें। वहीं, सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने क्षेत्र के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों से अभिलेख प्राप्त कर विद्यालयवार एवं शिक्षकवार सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
फर्जी प्रमाण-पत्र मिलने पर होगी कार्रवाई
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि सत्यापन के दौरान कोई शैक्षिक अथवा प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र फर्जी या कूटरचित पाया जाता है तो संबंधित शिक्षक की नियुक्ति निरस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही नियमानुसार वैधानिक एवं दंडात्मक कार्रवाई तथा प्राथमिकी (एफआईआर) भी दर्ज कराई जा सकती है। निर्धारित समय सीमा में अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने वाले शिक्षकों के साथ ही आदेश के अनुपालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रतन कीर्ति ने सभी संबंधित अधिकारियों एवं शिक्षकों को निर्देशों का समयबद्ध और शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। इस आदेश की प्रतिलिपि महानिदेशक स्कूल शिक्षा, जिलाधिकारी, शिक्षा निदेशक (बेसिक), मुख्य विकास अधिकारी, सचिव उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) सहित संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।


