मांट राजा पीएम श्री विद्यालय में एसी की सुविधा, डिजिटल लाइब्रेरी और टेबल टेनिस से बच्चों को मिल रहा बेहतर शैक्षिक माहौल
102 से बढ़कर 336 पहुंची छात्र संख्या, बीएसए रतन कीर्ति ने कहा- सभी शिक्षक ठान लें तो एक महीने में बदल सकते हैं विद्यालयों की सूरत
मथुरा। बेसिक शिक्षा अधिकारी रतन कीर्ति ने मांट राजा स्थित पीएम श्री उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य नरेंद्र तिवारी के प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नरेंद्र तिवारी ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति से सरकारी विद्यालय का कायाकल्प कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। यदि सभी शिक्षक इसी तरह समर्पण भाव से प्रयास करें तो सरकारी विद्यालयों की तस्वीर बदलने में अधिक समय नहीं लगेगा।
एसी में पढ़ाई, टेबल टेनिस और डिजिटल लाइब्रेरी बनी आकर्षण
बीएसए ने विद्यालय की व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि यहां बच्चे अब वातानुकूलित कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे हैं और टेबल टेनिस जैसी खेल सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। विद्यालय में डिजिटल लाइब्रेरी, कंप्यूटर कक्ष, स्मार्ट क्लास और सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की गई है। प्रधानाचार्य की पहल पर शाम के समय स्मार्ट क्लास में बच्चों को निःशुल्क अतिरिक्त शिक्षा भी दी जाती है। इसके साथ ही विद्यालय परिसर में लगभग 50 से 60 पौधों का सुंदर बगीचा विकसित किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है।
102 से बढ़कर 336 हुई छात्र संख्या
विद्यालय की प्रगति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2010 में नरेंद्र तिवारी ने जब प्रधानाचार्य का कार्यभार संभाला था, तब विद्यालय में मात्र 102 विद्यार्थी पंजीकृत थे। उनके निरंतर प्रयासों से आज छात्र संख्या बढ़कर 336 हो गई है। वर्तमान शैक्षिक सत्र में ही 66 नए बच्चों का नामांकन हुआ है। यह उपलब्धि साबित करती है कि बेहतर नेतृत्व, सकारात्मक सोच और समर्पित प्रयासों से सरकारी विद्यालयों को भी आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है।
दिव्यांगता को चुनौती बनाकर शिक्षा के क्षेत्र में कायम की मिसाल
बीएसए रतन कीर्ति ने प्रधानाचार्य नरेंद्र तिवारी के संघर्ष और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि नरेंद्र तिवारी ने स्वयं इसी सरकारी विद्यालय में शिक्षा ग्रहण की है। महज पांच वर्ष की उम्र में एक हादसे के कारण दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने अपनी व्यक्तिगत कठिनाइयों को पीछे छोड़कर बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए खुद को समर्पित कर दिया। उनका कार्य अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत है। सभी शिक्षकों को उनसे सीख लेकर अपने विद्यालयों को बेहतर बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।
एक महीने में बदल सकती है सरकारी विद्यालयों की तस्वीर
बीएसए रतन कीर्ति ने सभी शिक्षकों से अपील करते हुए कहा कि कोई भी काम असंभव नहीं है। यदि सभी विद्यालयों के शिक्षक दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ आगे आएं तो केवल एक महीने में वृक्षारोपण, साफ-सफाई और बेहतर व्यवस्थाओं के माध्यम से अपने विद्यालयों की तस्वीर बदल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रत्येक व्यक्ति अपने घर को सुंदर और व्यवस्थित रखता है, उसी तरह सरकारी विद्यालय भी शिक्षकों के अपने हैं। इन विद्यालयों को भी अपने घर और मंदिर की तरह संवारने की जिम्मेदारी सभी की है। सामूहिक प्रयासों और सकारात्मक सोच से ऐसा वातावरण तैयार किया जा सकता है, जहां बच्चों को पढ़ने में आनंद आए और शिक्षकों को पढ़ाने में संतुष्टि मिले।
उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे नरेंद्र तिवारी की तरह अपने-अपने विद्यालयों में एक महीने के भीतर कुछ नया और बेहतर करके दिखाएं, ताकि यह साबित हो सके कि शिक्षक किसी से कम नहीं हैं। नरेंद्र तिवारी ने वास्तव में सराहनीय और अनुकरणीय कार्य किया है।


