सहजनवा। पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए शासन स्तर पर कूड़ा जलाने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। इसके बावजूद सहजनवा नगर पंचायत प्रशासन की बड़ी मनमानी और लापरवाही सामने आ रही है। नगर पंचायत के सफाई कर्मियों द्वारा गाहासाड़ क्षेत्र में आबादी के ठीक नजदीक कूड़े का विशाल ढेर लगा दिया गया है, जिसमें आए दिन आग लगा दी जाती है। इस कूड़े से उठने वाले जहरीले धुएं और दुर्गंध के कारण स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल हो गया है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानकर भी अनजान बने बैठे हैं।
आरसीसी सेंटर कागजों में सिमटा, रेलवे लाइन किनारे बन गया डंपिंग ग्राउंड
शासन पर्यावरण प्रदूषण को लेकर बेहद गंभीर है। महानगरों से लेकर छोटे नगर निकायों तक से निकलने वाले कचरे के सही निस्तारण के लिए ‘आरसीसी सेंटर’ बनाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद सहजनवा नगर पंचायत में अब तक इस सेंटर का निर्माण नहीं हो सका है।
ठोस कचरा प्रबंधन की कोई उचित व्यवस्था न होने के कारण सफाई कर्मी अपनी मनमर्जी से जहाँ-तहाँ कूड़ा फेंक रहे हैं। वर्तमान में गाहासाड़ के पास रेलवे लाइन के किनारे खाली पड़ी जमीन को अवैध डंपिंग ग्राउंड बना दिया गया है। यहाँ चौबीसों घंटे सुलगने वाले कूड़े के ढेर ने हवा को जहरीला बना दिया है।
बुजुर्गों, बच्चों और बीमारों की फूल रही सांसें
कूड़े के इस ढेर से उठने वाली भीषण दुर्गंध से लोग पहले ही परेशान थे, रही-सही कसर सफाई कर्मियों द्वारा इसमें आग लगाने ने पूरी कर दी। दिन-रात सुलगने वाले इस धुएं के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, मासूम बच्चों और पहले से सांस की बीमारी (अस्थमा) से पीड़ित मरीजों को उठानी पड़ रही है। लोगों का घरों में बैठना और सामान्य रूप से सांस लेना भी दूभर हो चुका है।
स्थानीय निवासियों का आक्रोश:
नगर निवासी महेश कुमार, दिलीप सिंह, मनोज निषाद, सुनील और प्रदीप आदि ने रोष जताते हुए कहा कि इस कूड़े के ढेर और धुएं से पूरा इलाका नरक बन चुका है। नगर पंचायत कार्यालय में कई बार लिखित और मौखिक शिकायत की गई, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है
क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी
जब इस गंभीर समस्या को लेकर नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी सूर्यकांत से बात की गई, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा:
”नियम के मुताबिक कूड़ा आबादी से दूर फेंकना है और उसमें आग बिल्कुल नहीं लगानी है। अगर सफाई कर्मी इस तरह की गलती कर रहे हैं, तो उन्हें कड़ी चेतावनी दी जाएगी और व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए जाएंगे।
अब देखना यह है कि अधिकारी का यह बयान सिर्फ आश्वासन बनकर रह जाता है या गाहासाड़ के नागरिकों को इस जहरीले धुएं और प्रदूषण से सचमुच मुक्ति मिलती है।