जिला कारागार में ‘मुलाकात लीगल ऐड हेल्प डेस्क’ का उद्घाटन, बंदियों के परिजनों को मिलेगी कानूनी सहायता।

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जिला जज, जिलाधिकारी और एसएसपी ने किया कारागार का निरीक्षण, बच्चों को वितरित किए उपहार व महिला बंदियों को दिए प्रशिक्षण प्रमाणपत्र

मथुरा। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मथुरा के तत्वावधान में जिला कारागार परिसर में आगंतुकों एवं बंदियों के परिवारजनों की सुविधा के लिए स्थापित ‘मुलाकात लीगल ऐड हेल्प डेस्क’ का उद्घाटन माननीय जिला जज विकास कुमार, जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने फीता काटकर किया।

इस अवसर पर अधिकारियों ने बताया कि हेल्प डेस्क का मुख्य उद्देश्य बंदियों के परिवारजनों को आवश्यक कानूनी सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें न्यायिक प्रक्रियाओं से संबंधित जानकारी और सहयोग आसानी से मिल सके। यह पहल ‘मुलाकात से न्याय तक’ की अवधारणा को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उद्घाटन के बाद माननीय जिला जज, जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने जिला कारागार का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने महिला बंदी गृह, पाकशाला, चिकित्सालय, प्रशिक्षण केंद्र सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा प्रबंध तथा सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था का अवलोकन किया गया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कारागार परिसर में रह रहे बच्चों से संवाद किया तथा उन्हें टॉफी, चॉकलेट, लॉलीपॉप, बिस्किट, चिप्स एवं फ्रूटी वितरित की। बच्चों ने पहाड़े, गिनती, कविताएं, फलों के नाम, एबीसीडी और सप्ताह के दिनों का पाठ सुनाया। बच्चों के आत्मविश्वास और प्रस्तुति से प्रभावित जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने उनकी शिक्षिका के उत्कृष्ट कार्य की सराहना करते हुए आगामी 15 अगस्त को उन्हें सम्मानित करने के निर्देश दिए।

कारागार में महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लड्डू गोपाल माला निर्माण का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाली छह महिला बंदियों को माननीय जिला जज, जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रशिक्षण प्रमाणपत्र वितरित किए गए।

इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि कारागारों में सुधारात्मक एवं पुनर्वासात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देकर बंदियों के सामाजिक पुनर्स्थापन और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही, कानूनी सहायता सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।

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