रिपोर्ट : विजय नागपाल।
मथुरा। शुक्रवार को मोहर्रम कमेटी शहर व सदर के तत्वावधान में मोहर्रम की तीसरी तारीख शुक्रवार को हज़रत इमाम हुसैन की याद में यामीन पुत्र सकटुवा के नेतृत्व में परम्परागत क्षेत्र चौक बाजार से अलम का जुलूस निकाला गया।
अलम का जुलूस चौक बाजार से शुरू होकर अपने निर्धारित मार्ग कुशक गली, हनुमान टीला, इमाम बाड़ा, काजी पाड़ा, चूड़ी वाली गली, नक्कारची टीला, घीया मण्डी, भरतपुर गेट, मनोहरपुरा, मटिया दरवाजा, बरबार पाड़ा, मण्डी रामदास, ठेक नारनौल, खिड़की बिसायती, हालनगंज होते हुए वृन्दावन गेट चौक बाजार स्थित जामा मस्जिद पहुंचा। यहीं पर अलम जमाए गए और अखाड़ा जमा किया गया, जिसके बाद जुलूस का समापन हुआ।
जुलूस के चौक बाजार पहुंचने पर अखाड़ों के उस्तादों व खलीफाओं ने बिराह बांटी और लाठी आदि के दांव-पेंच और शारीरिक कलाबाजियों का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया। करतबों पर श्रद्धालुओं ने तालियों और नारे-ए-हैदरी से माहौल को भक्तिमय कर दिया।
पूरे मार्ग में जगह-जगह लंगर खाना सजाए गए। श्रद्धालुओं के लिए मीठे दूध, मीठे पानी की सबील, खीर, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक और मिठाई का वितरण किया गया।
पुलिस-प्रशासन ने पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
इस मौके पर भूरा शेख़ अध्यक्ष मोहर्रम कमेटी ने जुलूस रवाना होने से पहले अलमदारों, अखाड़ेदारों व ताजियेदारों को संबोधित करते हुए कहा कि “मोहर्रम का महीना सब्र, कुर्बानी और इबादत का पैगाम देता है। हमारा यह जुलूस आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है। सभी श्रद्धालु शांति और अनुशासन के साथ परम्परा के अनुसार जुलूस में शामिल हों। किसी भी अफवाह या उकसाने वाली बात पर ध्यान न दें। प्रशासन ने हमें हर संभव सहयोग दिया है, हमें भी उनकी मेहनत का सम्मान करते हुए जुलूस को सुव्यवस्थित रखना है”।
सचिव अबरार खान वारसी ने पुलिस-प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि “इस बार प्रशासन ने जुलूस के लिए बेहद मुस्तैद व्यवस्था की है। और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। इसके लिए हम जिला प्रशासन और पुलिस के आभारी हैं। मैं तमाम अकीदतमंदों से अपील करता हूं कि निर्धारित समय 7:30 बजे और तय मार्ग का ही पालन करें, ताकि जुलूस बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो और भाईचारे का पैगाम पूरे शहर में जाए”।
इस मौके पर भूरा शेख़ अध्यक्ष, अबरार खान वारसी सचिव, हाजी सूफी सईद हसन, जहीर अब्बास जैदी, बबलू कुरैशी, डॉ शबनम कुरैशी, शारिक अली एडवोकेट, कासिम गाजी, बदले खलीफा, आरिफ कुरैशी, अली अब्बास, शाहिद कुरैशी, नासिर अली, क़ायम, नौशाद ख़ान, आशिफ कुरैशी, आरिफ खान आदि मौजूद रहे।