रिपोर्ट: विजय नागपाल।
मथुरा। जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से किसानों द्वारा खाद की कथित कालाबाज़ारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों का आरोप है कि सरकारी दर पर उपलब्ध होने वाली डीएपी और यूरिया निजी दुकानों पर निर्धारित मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर बेची जा रही है।
किसानों का कहना है कि यदि डीएपी, जिसका सरकारी मूल्य लगभग ₹1350 प्रति बोरी है, उसे ₹2200 तक बेचा जा रहा है और यूरिया, जिसकी निर्धारित कीमत ₹265 है, उसके लिए ₹500 तक वसूले जा रहे हैं, तो यह गंभीर जांच का विषय है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
किसानों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि कहीं कृत्रिम अभाव पैदा कर खाद की कालाबाज़ारी की जा रही है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
किसानों का कहना है कि देश का अन्नदाता समय पर उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध न होने से परेशान है। उनका आग्रह है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि किसानों को निर्धारित सरकारी दर पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध हो और किसी भी प्रकार की कालाबाज़ारी या जमाखोरी पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि खरीफ सीजन में खाद की उपलब्धता और मूल्य पर नियमित निगरानी आवश्यक है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।