औरैया। जिले के परिषदीय विद्यालयों में जर्जर एवं निष्प्रयोज्य भवनों के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिले के 115 विद्यालयों में जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के लिए कराई गई नीलामी प्रक्रिया चार बार अपेक्षित बोली नहीं मिलने के कारण विफल हो गई। अब जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने संबंधित अधिकारियों को शासनादेश एवं निर्धारित नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्ट्रेट स्थित मानस सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित जिला शिक्षा परियोजना समिति की बैठक में जर्जर विद्यालय भवनों के मामले की समीक्षा की गई। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि तकनीकी समिति से भवनों का मूल्यांकन कराने के बाद उनकी नीलामी के लिए चार बार प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन मूल्यांकित धनराशि के बराबर या उससे अधिक बोली नहीं मिलने के कारण नीलामी पूरी नहीं हो सकी।
जिले में सबसे अधिक अजीतमल विकासखंड के 25 विद्यालय जर्जर भवनों की नीलामी के दायरे में हैं। इसके अलावा बिधूना के 20, एरवाकटरा के 18, औरैया के 16, सदर के 15, भाग्यनगर के 11, अछल्दा के नौ तथा नगर क्षेत्र के एक विद्यालय का जर्जर भवन शामिल है।
डीएम ने संबंधित विद्यालय प्रबंध समितियों और ग्राम पंचायतों के समन्वय से शासनादेश के अनुरूप जर्जर एवं निष्प्रयोज्य भवनों के निस्तारण की कार्रवाई शीघ्र पूरी कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी परिस्थिति में जर्जर अथवा निष्प्रयोज्य भवन में बच्चों की कक्षाएं संचालित न की जाएं। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी रामकृपाल चौधरी, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, परियोजना निदेशक डीआरडीए सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


