•ग्रामीणों ने डीएम से आवास और विकास कार्यों की जमीनी जांच कराने की मांग की।
रिपोर्ट: राहुल मिश्रा।
मिश्रिख, सीतापुर। विकासखंड मिश्रिख की कई ग्राम पंचायतों में साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वच्छता के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। एक ओर प्रदेश सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को स्वच्छ रखने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर कई ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था बदहाल बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत आंट, लकड़ियामऊ, आठवां, भिखानपुर, ठाकुरनगर और इस्लामनगर समेत दर्जनों ग्राम पंचायतों में सफाईकर्मी नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे हैं। कई स्थानों पर महीनों से सफाई नहीं होने के कारण नालियां और सार्वजनिक स्थल गंदगी से पटे होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे गांवों में संक्रमण फैलने का खतरा भी बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से ग्राम पंचायतों में साफ-सफाई सहित विभिन्न विकास कार्यों के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। इसके बावजूद यदि नियमित सफाई नहीं हो रही है तो जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने मामले की जांच कराकर लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
आवास आवंटन की भी हो जमीनी जांच
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायतों में सरकार की ओर से दिए गए आवासों की भी जमीनी स्तर पर जांच कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पात्र लाभार्थियों को वास्तव में आवास का लाभ मिला है या नहीं, इसकी मौके पर जाकर जांच की जानी चाहिए। साथ ही आवास योजना के तहत खर्च की गई धनराशि का भी सत्यापन कराया जाए।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए मिश्रिख विकासखंड की ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था, आवास योजना और अन्य विकास कार्यों की जमीनी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच से ही सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

