रिपोर्ट: मयंक त्रिपाठी।
औरैया। नगर के बेला रोड पर स्थित हरी गार्डन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रुक्मिणी विवाह का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया गया। कथा के दौरान गाए गए बधाई गीतों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पूरा परिसर राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण के जयघोषों से गूंज उठा। इस दौरान श्रद्धालु श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबे नजर आए।
छठे दिन कथा वाचक आचार्य डॉ मनोज शुक्ला मनु जी महाराज ने महारास, मथुरा गमन, कंस वध, उद्धव चरित्र के साथ ही रुक्मिणी मंगल की भावपूर्ण कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि रुक्मिणी जी का प्रेम विशुद्ध, निस्वार्थ और समर्पित था। ऐसा प्रेम ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग है। प्रेम ही ईश्वर का वास्तविक स्वरूप है।
कथा वाचक ने कहा कि रुक्मिणी को माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। वह विदर्भ साम्राज्य की पुत्री थीं, जो भगवान श्रीकृष्ण से विवाह करने की इच्छुक थीं। लेकिन उनके पिता व भाई इस विवाह से सहमत नहीं थे। उन्होंने दूत के माध्यम से अपने दिल की बात श्रीकृष्ण तक पहुंचाई।
जिसके बाद भगवान का उनके भाई और पिता से युद्ध हुआ। अंत में श्री कृष्ण और रुक्मिणी जी का विवाह सफल हुआ। इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष राघव मिश्रा, मनोनीत सभासद कुलदीप पोरवाल “पत्रकार” भाजपा नेता अक्षय ठाकुर ने आचार्य जी व परीक्षित सुखराम दास पोरवाल का सम्मान किया । इस अवसर पर सुनील पोरवाल, डॉक्टर सुधीर पोरवाल, अखिलेश पोरवाल, सौरभ पोरवाल आदि परिजन व्यवस्थाओं की देखरेख में जुटे रहे ।


