महुआ डाबर महोत्सव-2026 : 1857 के गुमनाम शहीदों की स्मृति में तीन दिवसीय आयोजन 8 से 10 जून तक

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प्रसिद्ध लेखक प्रणव मुखर्जी करेंगे उद्घाटन, शौर्य, शहादत और विरासत को समर्पित होगा महोत्सव

महुआ डाबर, बस्ती। भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की अमर गाथा और गुमनाम शहीदों की स्मृति को समर्पित तीन दिवसीय “महुआ डाबर महोत्सव-2026” का आयोजन 8, 9 एवं 10 जून 2026 को क्रांतिभूमि महुआ डाबर में किया जाएगा। महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा आयोजित इस महोत्सव की थीम “शौर्य, शहादत और विरासत” निर्धारित की गई है। महोत्सव का उद्घाटन प्रसिद्ध लेखक प्रणव मुखर्जी करेंगे।

उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के बहादुरपुर विकासखंड में मनोरमा नदी के तट पर स्थित महुआ डाबर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक महत्वपूर्ण एवं गौरवशाली अध्याय है। वर्तमान में उजड़े हुए इस ऐतिहासिक स्थल ने 1857 की क्रांति के दौरान ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध हुए अभूतपूर्व जनप्रतिरोध तथा भीषण नरसंहार को देखा है।

स्वतंत्रता संग्राम से पूर्व महुआ डाबर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कपड़ा व्यापार और पीतल उद्योग का प्रमुख केंद्र था। मनोरमा नदी के तट पर स्थित होने के कारण यहां से नौकाओं द्वारा व्यापक व्यापार संचालित होता था। दो मंजिला पक्के मकानों, समृद्ध बाजारों और शिक्षित समाज के कारण यह क्षेत्र एक विकसित एवं आत्मनिर्भर कस्बे के रूप में प्रसिद्ध था।

10 जून 1857 को फैजाबाद से बिहार के दानापुर की ओर जा रहे ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों के एक दल को महुआ डाबर के क्रांतिकारियों ने चुनौती दी। क्रांतिकारी जफर अली एवं उनके साथियों ने नदी पार कर रहे अंग्रेज अधिकारियों को घेर लिया, जिसमें लेफ्टिनेंट लिण्डसे और लेफ्टिनेंट थॉमस सहित छह ब्रिटिश अधिकारी मारे गए। केवल सार्जेंट बुशर किसी प्रकार जान बचाकर निकल सका, जिसे बाद में बाबू बल्ली सिंह ने दस दिनों तक बंदी बनाकर रखा।

इस घटना से क्रुद्ध ब्रिटिश शासन ने 3 जुलाई 1857 को घुड़सवार सेना के साथ महुआ डाबर को चारों ओर से घेर लिया। अंग्रेजी सैनिकों ने अंधाधुंध गोलीबारी कर लगभग पांच हजार निर्दोष ग्रामीणों, कारीगरों और नागरिकों की हत्या कर दी तथा पूरे कस्बे को आग के हवाले कर दिया। घर, दुकानें, खेत और फसलें नष्ट कर दी गईं।

इतिहास के इस अध्याय को दबाने के उद्देश्य से अंग्रेजों ने महुआ डाबर का नाम सरकारी अभिलेखों और नक्शों से मिटा दिया। इसके स्थान पर दूरस्थ क्षेत्र में एक नया गांव बसाकर उसे महुआ डाबर नाम दिया गया तथा मूल स्थल को राजस्व अभिलेखों में “गैर-चिरागी” घोषित कर दिया गया।

महुआ डाबर संग्रहालय इस ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने का कार्य कर रहा है। वर्ष 1999 में स्थापित संग्रहालय के विकास में इसके महानिदेशक एवं क्रांतिकारी वंशज डॉ. शाह आलम राना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संग्रहालय में दुर्लभ दस्तावेज, हथियार, सिक्के तथा पुरातात्विक अवशेष संरक्षित हैं, जो इस भूले-बिसरे नरसंहार की ऐतिहासिक सच्चाई को सामने लाते हैं।

वर्ष 2010 में लखनऊ विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग द्वारा प्रोफेसर अनिल कुमार के निर्देशन में यहां पुरातात्विक उत्खनन कराया गया। उत्खनन में प्राचीन कुएं, लखौरी ईंटों की दीवारें, जली हुई लकड़ियां, सिक्के, ढाल, भाले तथा पुराने भवनों के अवशेष प्राप्त हुए, जिन्होंने इस ऐतिहासिक घटना के प्रमाणों को पुष्ट किया।

डॉ. राना के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप महुआ डाबर को उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 के “स्वतंत्रता संग्राम सर्किट” में शामिल किया गया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा यहां लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में एक भव्य एवं जीवंत स्मारक विकसित करने की प्रक्रिया जारी है। प्रत्येक वर्ष यहां शहीदों को शस्त्र सलामी देकर श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।

महुआ डाबर महोत्सव-2026 : कार्यक्रम विवरण

स्थान : क्रांतिस्थल, मनोरमा तट, महुआ डाबर, बहादुरपुर, बस्ती

प्रथम दिवस : 08 जून 2026 (सोमवार)

प्रातः 08:00 बजे – क्रांतिवीरों को श्रद्धांजलि एवं पुष्पांजलि

प्रातः 09:00 बजे – स्वास्थ्य परीक्षण एवं निःशुल्क दवा वितरण शिविर

प्रातः 10:00 बजे – स्थानीय विद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

प्रातः 11:00 बजे – महुआ डाबर के इतिहास पर परिचर्चा

सायं 04:00 बजे – विरासत यात्रा (हेरिटेज वॉक)

रात्रि 08:00 बजे – स्वतंत्रता संग्राम आधारित फिल्म एवं वृत्तचित्र प्रदर्शन

द्वितीय दिवस : 09 जून 2026 (मंगलवार)

प्रातः 10:00 बजे – स्वतंत्रता संग्राम साहित्य सम्मेलन

प्रातः 11:00 बजे – इतिहासकारों, शोधार्थियों एवं लेखकों का संवाद

अपराह्न 03:00 बजे – ओपन माइक : कविता, गीत, वक्तृत्व एवं लोककला प्रदर्शन

सायं 04:00 बजे – युवाओं हेतु करियर काउंसलिंग सत्र

सायं 05:30 बजे – मशाल सलामी

रात्रि 08:00 बजे – शहीदों की झांकी एवं नाट्य मंचन

तृतीय दिवस : 10 जून 2026 (बुधवार) – शहादत दिवस

प्रातः 08:00 बजे – सशस्त्र पुलिस गारद द्वारा शस्त्र सलामी

प्रातः 09:00 बजे – महुआ डाबर संग्रहालय भ्रमण

प्रातः 10:00 बजे – विरासत संरक्षण संकल्प सभा

सायं 04:00 बजे – उत्कृष्ट प्रतिभाओं एवं सहयोगियों का सम्मान

सायं 05:00 बजे – सांस्कृतिक संध्या एवं लोक कलाकारों की प्रस्तुति

सायं 06:00 बजे – राष्ट्रगान एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ महोत्सव का समापन

महुआ डाबर महोत्सव-2026 केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि उन हजारों गुमनाम शहीदों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह महोत्सव नई पीढ़ी को अपने इतिहास, विरासत और बलिदान की गौरवशाली परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

इस अवसर पर प्रचार-प्रसार अभियान से जुड़े अतुल कुमार सिंह, नासिर खान, सुनील पंडित, आदिल खान आदि ने तैयारियों की समीक्षा की।

Author

  • Pawan Rastogi

    पवन कुमार रस्तोगी पिछले पाँच वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता एवं डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में न्यूज़ पोर्टल में एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इन्होंने एम.ए., बीएड, पत्रकारिता तथा एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त कंप्यूटर क्षेत्र में एडीसीए तथा कला के क्षेत्र में बॉम्बे आर्ट जैसे पाठ्यक्रम भी पूर्ण किए हैं।
    समाचार लेखन, संपादन, जनसरोकार से जुड़े विषयों और डिजिटल पत्रकारिता में उनकी विशेष रुचि है। निष्पक्ष, तथ्यपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। वे सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को सरल, सटीक और विश्वसनीय ढंग से पाठकों तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

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