गाजियाबाद। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गाजियाबाद में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ पदयात्रा का तिरंगा लहराकर नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखे राजनीतिक हमले किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव में जीत का श्रेय अपनी मेहनत को देते हैं, लेकिन हारने पर ईवीएम, चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को जिम्मेदार ठहराते हैं। अपनी नाकामी का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ना इन दलों की राजनीतिक प्रवृत्ति बन गई है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बार-बार परीक्षा में असफल होने वाले उस लड़के की तरह हैं, जो हर बार अपनी नाकामी का नया बहाना बनाता है। वहीं, अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी कांग्रेस की पिछलग्गू बन गई है। दोनों दलों का अभियान लोकतंत्र बचाने के बजाय अपने परिवारों को बचाने की कवायद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र प्रत्येक नागरिक को समान रूप से मताधिकार के प्रयोग की ताकत देता है। इस अधिकार की रक्षा के लिए संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी कमियों का ठीकरा किसी संस्था पर नहीं फोड़ती, बल्कि आत्मावलोकन करती है। कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर लोकतंत्र के प्रति अविश्वास का माहौल बनाने का प्रयास कर रही है। ऐसा करके वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की विरासत का भी अपमान कर रही है।
योगी आदित्यनाथ ने 1975 में लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस कांग्रेस ने देश के लोकतंत्र को बेड़ियों में जकड़ा, वही आज लोकतंत्र की दुहाई दे रही है। राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता अपनी चुनावी असफलताओं के लिए कभी चुनाव आयोग, कभी ईवीएम और कभी दूसरे कारणों को जिम्मेदार ठहराते हैं।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि उसके शासनकाल में कॉमनवेल्थ, उर्वरक, दो-जी और कोयला घोटाले सामने आए। उनके मुताबिक, इन घटनाओं के कारण कांग्रेस ने जनता का विश्वास खोया और वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने नई सरकार चुनी।
समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चार बार सत्ता में रहने के बावजूद सपा की पहचान गुंडागर्दी, अराजकता, कर्फ्यू और दंगों से बनी। उन्होंने सपा के पुराने राजनीतिक दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय ‘जिस गाड़ी पर सपा का झंडा, समझो बैठा है कोई कुख्यात गुंडा’ जैसी कहावत प्रचलित थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासन में महिलाओं और व्यापारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे और कई स्थानों पर सांप्रदायिक दंगे हुए। कोसीकलां, मुजफ्फरनगर और मथुरा की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बरेली, संभल, मुरादाबाद, बुलंदशहर, मेरठ और सहारनपुर में भी दंगे हुए।
मुख्यमंत्री ने राम मंदिर आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में रामभक्तों पर गोलियां चलवाई गई थीं और कांग्रेस ने भी राम मंदिर निर्माण के रास्ते में बाधाएं खड़ी की थीं। उन्होंने कहा कि रामलला को लंबे समय तक अस्थायी ढांचे में रहना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए सभी राजनीतिक दलों को निमंत्रण दिया गया था, लेकिन कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता इसमें शामिल नहीं हुए।
योगी ने एक नवंबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने 1984 में दिल्ली में हुए सिख नरसंहार का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर उस दौर की घटनाओं को लेकर निशाना साधा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को उस समय सिख समुदाय के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह अपने राजनीतिक हितों के लिए सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाती रही है।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न राज्यों में कांग्रेस की चुनावी स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में 1985 के बाद पार्टी को जनादेश नहीं मिला। तमिलनाडु में 1967 के बाद वह सत्ता में नहीं लौटी और पश्चिम बंगाल में 1977 से सत्ता से बाहर है। उन्होंने गुजरात, सिक्किम, ओडिशा, त्रिपुरा और नगालैंड का भी उल्लेख किया।
योगी ने कहा कि एसआईआर शुरू होने से पहले ही जनता ने कई राज्यों में कांग्रेस को नकार दिया है, लेकिन पार्टी अपनी कमियों की समीक्षा करने के बजाय चुनाव आयोग पर आरोप लगा रही है।उन्होंने कहा कि भाजपा ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की राजनीति को जनता के सामने रखने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी परिवार आधारित राजनीति कर रही हैं और अपने परिवारों के हितों को प्राथमिकता दे रही हैं। उन्होंने कहा कि इन दलों की ओर से लोकतंत्र बचाने की बात करना उनकी राजनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने का प्रयास है।
विकसित भारत के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में बदलाव हुए हैं। उन्होंने दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल, एम्स, आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल कॉलेज, सेमीकंडक्टर इकाइयों और मोबाइल निर्माण के विस्तार का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि पहले देश मोबाइल फोन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था, जबकि अब भारत में बड़े पैमाने पर मोबाइल फोन का निर्माण हो रहा है।मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि चार करोड़ गरीब परिवारों को आवास, 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन और 55 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिला है।
उन्होंने कहा कि 56 करोड़ लोगों के जनधन खाते खोले गए, 12 करोड़ परिवारों को शौचालय, 10 करोड़ घरों को रसोई गैस कनेक्शन और 3.5 करोड़ परिवारों को बिजली के मुफ्त कनेक्शन दिए गए। किसान सम्मान निधि, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और कृषि में तकनीक के इस्तेमाल को भी उन्होंने किसानों के हित में उठाए गए कदम बताया।
कोरोना महामारी का जिक्र करते हुए योगी ने कहा कि वर्ष 2020 में जब पूरी दुनिया महामारी से जूझ रही थी, तब भारत ने जांच, उपचार, राशन और टीकाकरण की व्यवस्था की।
उन्होंने दावा किया कि भारत में विकसित टीके से देश को महामारी से उबरने में मदद मिली और 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराकर सहायता की गई। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर टीकाकरण अभियान को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप भी लगाया।
कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, सह प्रभारी अनंत ओझा, राज्यसभा सांसद रामप्रताप सिंह चौहान, क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर, प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, पार्टी पदाधिकारी और राष्ट्रीय लोकदल के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


