•शिलापट्ट पर नाली और सड़क निर्माण का दावा, मौके पर नाली गायब; श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशानी
मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और धार्मिक आस्था से जुड़ी पवित्र नगरी गोकुल में विकास कार्यों को लेकर किए जा रहे दावों की हकीकत अब सवालों के घेरे में है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को जहां मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है, वहीं कई स्थानों पर विकास कार्यों की स्थिति और उनके दावों में अंतर नजर आ रहा है।
गोकुल के परिक्रमा मार्ग की स्थिति भी श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल पाता कि परिक्रमा मार्ग कहां से शुरू होता है और किस रास्ते से होकर गुजरता है। मार्ग पर पर्याप्त संकेतक और व्यवस्थाएं नहीं होने से श्रद्धालुओं को असुविधा का सामना करना पड़ता है।
वहीं, पूतना कुंड समेत विभिन्न स्थानों पर विकास कार्यों के लोकार्पण से संबंधित शिलापट्ट जरूर दिखाई देते हैं, लेकिन मौके पर कार्यों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। गोकुल नगर पंचायत क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण तो कराया गया है, लेकिन कई शौचालयों पर ताले लटके हुए हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इसी तरह नाली, सड़क, पेयजल और तालाबों के सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों को लेकर भी सवाल सामने आ रहे हैं। कुछ स्थानों पर लगे शिलापट्टों पर नाली और सड़क निर्माण का उल्लेख है, लेकिन मौके पर नाली दिखाई नहीं देने की बात सामने आई है। इससे विकास कार्यों की गुणवत्ता और उनके क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिलापट्ट बनाम धरातल की हकीकत
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों का केंद्र यही है कि क्या विकास कार्य केवल शिलापट्टों तक सीमित हैं या वास्तव में उनका लाभ आमजन और श्रद्धालुओं को मिल रहा है। गोकुल जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छता, शौचालय, पेयजल, सड़क और सुगम परिक्रमा मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होना बेहद जरूरी है।
सामने आई तस्वीरों ने गोकुल के विकास कार्यों और व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित जिम्मेदार अधिकारी इन शिकायतों और तस्वीरों का संज्ञान लेकर मौके पर निरीक्षण करते हैं या नहीं, और यदि खामियां मिलती हैं तो उनके सुधार के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।


