•सिरदर्द, हाथों में झनझनाहट और गर्दन की गति कम होना भी हो सकता है संकेत; लंबे समय तक मोबाइल-कंप्यूटर के इस्तेमाल से बढ़ रहा जोखिम
नई दिल्ली। लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन के सामने बैठकर काम करने की वजह से गर्दन से जुड़ी समस्याएं आम होती जा रही हैं। लगातार एक ही मुद्रा में बैठे रहने से गर्दन की मांसपेशियों और रीढ़ पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में गर्दन में दर्द या अकड़न जैसे लक्षण दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते ध्यान देना जरूरी है।
गर्दन में दर्द या अकड़न
गर्दन में लगातार दर्द या अकड़न महसूस होना सामान्य थकान का संकेत हो सकता है, लेकिन यह मांसपेशियों में खिंचाव, कमजोरी या चोट से जुड़ी समस्या की ओर भी इशारा कर सकता है। लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करने से परेशानी बढ़ सकती है। हल्की स्ट्रेचिंग और गर्दन की सामान्य एक्सरसाइज से राहत मिल सकती है।
बार-बार सिरदर्द होना
लगातार कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल करने और गलत मुद्रा में बैठने से गर्दन पर तनाव बढ़ सकता है, जिसका असर सिरदर्द के रूप में भी दिखाई दे सकता है। स्क्रीन के सामने बैठते समय मुद्रा सही रखना और बीच-बीच में ब्रेक लेना जरूरी है। पर्याप्त पानी पीना और आरामदायक कुर्सी का इस्तेमाल भी मददगार हो सकता है।
हाथों में सुन्नपन या झनझनाहट
हाथों में बार-बार सुन्नपन या झनझनाहट महसूस होना भी ध्यान देने योग्य संकेत है। गर्दन की नसों पर दबाव पड़ने की स्थिति में हाथों तक जाने वाली नसों से जुड़े लक्षण दिखाई दे सकते हैं। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना या गलत मुद्रा में सोना भी परेशानी को बढ़ा सकता है। ऐसे लक्षण लगातार बने रहें तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
नींद में परेशानी
सोते समय गर्दन में दर्द या अकड़न होने से नींद प्रभावित हो सकती है। गलत तकिए या सोने की मुद्रा के कारण भी गर्दन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसके कारण रात में नींद पूरी न होने के साथ दिनभर थकान महसूस हो सकती है। इसलिए सोने के लिए गर्दन को उचित सहारा देने वाले तकिए और आरामदायक मुद्रा का ध्यान रखना चाहिए।
गर्दन की गति कम होना
गर्दन को दाएं-बाएं या ऊपर-नीचे घुमाने में परेशानी होना भी एक महत्वपूर्ण संकेत है। मांसपेशियों में तनाव या खिंचाव इसकी वजह हो सकता है। नियमित रूप से हल्की स्ट्रेचिंग और सही मुद्रा अपनाने से गर्दन पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
समय रहते बरतें सावधानी
गर्दन से जुड़े इन लक्षणों को लगातार नजरअंदाज करने के बजाय उनकी वजह पर ध्यान देना जरूरी है। काम के दौरान सही मुद्रा बनाए रखना, नियमित अंतराल पर ब्रेक लेना और हल्की शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। यदि दर्द, सुन्नपन, कमजोरी या गर्दन की गति में कमी लगातार बनी रहे या बढ़ती जाए, तो चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।


