-दिबियापुर-बिधूना में ब्राह्मण चेहरे के विकल्प की चर्चा तेज, अखिलेश के बिधूना दौरे में लालजी शुक्ला से नजदीकी ने बढ़ाया सियासी कयास
रिपोर्ट: मयंक त्रिपाठी।
औरैया। 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी की नजर अब औरैया जिले की तीनों विधानसभा सीटों के ब्राह्मण मतदाताओं पर भी टिकती दिखाई दे रही है। पार्टी के प्रभावशाली ब्राह्मण नेता और सिकंदरा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी लालजी शुक्ला को इस रणनीति में अहम भूमिका दिए जाने की चर्चा ने जिले की सियासत में हलचल बढ़ा दी है।
खास बात यह है कि हाल में बिधूना में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दौरे के दौरान लालजी शुक्ला की उनसे नजदीकी साफ नजर आई थी। इसके बाद शुक्ला की सपा में बढ़ती भूमिका को लेकर सियासी चर्चाएं लगातार तेज हैं।
विधानसभा 2000 चुनाव 2027 में लालजी शुक्ला का राजनीतिक आधार केवल सिकंदरा तक सीमित नहीं माना जाता। उनके बड़े भाई औरैया सदर विधानसभा से बसपा के टिकट पर विधायक रह चुके हैं और दिबियापुर विधानसभा से भी चुनाव लड़ चुके हैं, जहां उन्हें 50 हजार से अधिक वोट मिले थे। बसपा सरकार के दौरान लालजी शुक्ला के बड़े भाई रामजी शुक्ला दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री भी रहे हैं।
परिवार के इस पुराने चुनावी प्रभाव को देखते हुए सपा के लिए शुक्ला की सक्रियता दिबियापुर और आसपास के क्षेत्रों में खास मायने रख सकती है।
दिबियापुर-बिधूना में ब्राह्मण विकल्प से बदल सकता है गणित
सियासी चर्चा है कि सपा यदि दिबियापुर या बिधूना में ब्राह्मण समाज से मजबूत चेहरे को विकल्प के तौर पर आगे करती है तो टिकट की दौड़ में लगे कई दावेदारों का गणित बदल सकता है। पार्टी की रणनीति केवल एक प्रत्याशी उतारने तक सीमित न रहकर ब्राह्मण मतदाताओं के बीच पकड़ मजबूत करने और दूसरे सामाजिक समूहों को साथ जोड़ने की हो सकती है।
दिबियापुर में शुक्ला परिवार का पुराना चुनावी जुड़ाव और 50 हजार से अधिक वोटों का आंकड़ा इस चर्चा को और वजन देता है। वहीं बिधूना में अखिलेश यादव के दौरे के दौरान लालजी शुक्ला से उनकी नजदीकी ने इस संभावना को लेकर चर्चाओं को और हवा दे दी है।
सदर से सिकंदरा, भरथना-रसूलाबाद तक असर की संभावना
लालजी शुक्ला को सपा की ओर से महत्व मिलने का असर औरैया सदर, दिबियापुर, बिधूना के साथ भरथना, रसूलाबाद और सिकंदरा तक महसूस किया जा सकता है। सदर में उनके बड़े भाई का विधायक रहना, दिबियापुर में उनका पुराना चुनावी प्रभाव और सिकंदरा में खुद लालजी शुक्ला का चुनाव लड़ने का अनुभव पार्टी के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में उपयोगी कड़ी बन सकता है।
यही वजह है कि चर्चा अब सिर्फ इस बात पर नहीं है कि लालजी शुक्ला को टिकट मिलेगा या नहीं, बल्कि इस पर भी है कि सपा उन्हें 2027 में ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की बड़ी रणनीति में कितना महत्व देती है। यदि दिबियापुर या बिधूना में ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाया गया तो इसका असर केवल एक सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास की सीटों के टिकट और चुनावी समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं।
फिलहाल सपा की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से नजदीकी, शुक्ला परिवार का पुराना चुनावी आधार और ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर पार्टी की संभावित रणनीति ने 2027 से पहले नई सियासी अटकलों को जरूर जन्म दे दिया है।


