-राष्टीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान पूसा दिल्ली ने किया आयोजन
-300 महिला किसानों को तकनीकि प्रशिक्षण व कृषि आदान बांटे
रिपोर्ट: विजय नागपाल।
अड़ींग (मथुरा)। खेती एक संस्कृति है। बरसा जल को संरक्षित किए बिना पानी खत्म हो जाएगा। जमीन में 0.7 प्रतिशत कार्बन भारत में रह गया है। गाय के एक किलो गोबर से कयी गुना जल दोहन क्षमता बढ़ती है। भैंस यमराज का, नंदी शिव का व गाय भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी है। इस लिए गौ आधारित ऋषि कृषि से ही किसान बचेगा।
यह विचार काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डा. धर्मेन्द्र मिश्रा ने व्यक्त किए। वह कल्यणं करोति नेत्र संस्थान जचौंदा सभागार में राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान,पूसा नई दिल्ली के सोजन्य से
अनुसूचित जाति उप योजना एस. सी. एस. पी. कृषक वैज्ञानिक संगोष्ठी एवं कृषि उपकरण वितरण कार्यक्रम में अपना संबोधन दे रहे थे।
एक सोच फाउंडेशन के तत्वाधान में इस कार्यक्रम में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आने वाली 300 महिला किसान शामिल हुईं।
फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक अजय सुमन शुक्ला ने बताया कि फाउंडेशन मथुरा जिले में महिलाओं के लिए विभिन्न कार्यक्रम जैसे डिजिटल बैंकिंग के लिए नारी अधिकारी कार्यक्रम, वित्तीय साक्षरता एवं समावेशन कार्यक्रम, डिजिटललिट्रेसी कार्यक्रम एवं युवाओं के लिए डिजिटल साथी कार्यक्रम संचालित कर रहा है|
कार्यक्रम में पूसा संस्थान से वरिष्ट वैज्ञानिक- प्रोफेसर जसदीप पडारिया, डॉ. मोनिका दलाल डॉ. आशीष कुमार,. डॉ. महेश राव शामिल हुए।
इस कार्यक्रम में किसानों को कृषि सामग्री किट वितरित किए गया जिसमें मुख्यतः स्प्रे मशीन, हैण्ड वीडर, इफको नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, सागरिका, जैव उर्वरक, पशुओं के लिए मिनिरल, अमरुद एवं आनर के उन्नत किस्म के पौधे वितरित किये गए |
कार्यक्रम में केवीके से डा. वाई के शर्मा ने कृषि में नैनो तकनीक, केनरा बैंक से विनोद शर्मा ने खेती और किसानों को वित्तीय सहायता व प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी।
डा. सर्वेश जीएलए, इफको से राहुल मिश्रा आदि ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण बीज, मृदा एवं पोषक तत्व प्रबंधन, फसल उत्पादन, कीट एवं रोग प्रबंधन, टिकाऊ कृषि तथा कृषि आय बढ़ाने के उपायों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि किसानों का वास्तविक सशक्तिकरण केवल संसाधनों के वितरण से नहीं, बल्कि ज्ञान, तकनीक, गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री और निरंतर वैज्ञानिक मार्गदर्शन को एक साथ उपलब्ध कराने से संभव है। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसलों का चयन तथा कम लागत वाली तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया।
आयोजन में कल्याणं करोति संस्थान की ओर से सी ई ओ श्रीमती प्रीति शर्मा ने मातृशक्ति का उत्साह वर्धन किया। अडी़ंग एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के निदेशक दिलीप कुमार यादव का सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन शिव प्रकाश ने किया।

