-केवल क्वालीफाइंग परीक्षा के लिए इतनी दूर भेजना सरकार की छात्र हितों के प्रति संवेदनहीनता
अयोध्या। राष्ट्रीय छात्र संगठन अध्यक्ष जय प्रताप गुप्ता ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा आयोजित प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) के परीक्षा केंद्र अभ्यर्थियों के निवास स्थान से लगभग 400 से 600 किलोमीटर दूर आवंटित किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सरकार की इस व्यवस्था की निंदा की है।
उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि एक ऐसी परीक्षा, जो केवल प्रारंभिक अर्हता परीक्षा है, उसके लिए भी अभ्यर्थियों को अपने घरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजा जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यूपीएसएसएससी पीईटी उत्तीर्ण करने मात्र से किसी अभ्यर्थी को नौकरी नहीं मिलती, बल्कि यह केवल भविष्य में होने वाली विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने के लिए पात्रता का एक प्रारंभिक चरण है। इसके बाद भी अभ्यर्थियों को मुख्य भर्ती प्रक्रिया और चयन के अन्य चरणों से गुजरना पड़ता है। ऐसे में इस परीक्षा के लिए इतनी दूर केंद्र आवंटित करने का औचित्य समझ से परे है।
राष्ट्रीय छात्र संगठन अध्यक्ष जय प्रताप गुप्ता ने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले सभी अभ्यर्थी संपन्न परिवारों से नहीं आते। बड़ी संख्या में गरीब, मध्यमवर्गीय और ग्रामीण परिवारों के बच्चे सीमित संसाधनों में अपने बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष करते हैं। 400 से 600 किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित करना उनके ऊपर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने जैसा है। अनेक ऐसे अभ्यर्थी हैं, जिनके पास आने-जाने और ठहरने तक का खर्च उठाने की क्षमता नहीं थी और वे परीक्षा देने से ही वंचित रह गए।
उन्होंने कहा कि जो अभ्यर्थी किसी तरह परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे, उन्हें भी बसों और ट्रेनों में भारी भीड़ के बीच बेहद कठिन परिस्थितियों में सफर करना पड़ा। विद्यार्थियों को जानवरों की तरह ठूंसकर यात्रा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस अव्यवस्था के कारण उन्हें शारीरिक पीड़ा के साथ मानसिक तनाव और असुरक्षा का सामना करना पड़ा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के बाद भी सीधे नौकरी नहीं मिलनी है, तब अभ्यर्थियों को इतनी दूर भेजकर उनकी आर्थिक और शारीरिक परीक्षा लेने की क्या आवश्यकता है? क्या सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों को गरीब विद्यार्थियों की परिस्थितियों का जरा भी ध्यान नहीं है? यह स्थिति सरकार की छात्र हितों के प्रति संवेदनशीलता की कमी को उजागर करती है।
राष्ट्रीय छात्र संगठन अध्यक्ष जय प्रताप गुप्ता ने सरकार और यूपीएसएसएससी से मांग की कि परीक्षा केंद्रों का आवंटन अभ्यर्थियों के गृह जनपद अथवा आसपास के जिलों में किया जाए। जिन अभ्यर्थियों को अत्यधिक दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं, उनके हित में तत्काल उचित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए तथा जो अभ्यर्थी दूरी और आर्थिक कठिनाइयों के कारण परीक्षा नहीं दे सके, उन्हें परीक्षा में शामिल होने का एक और अवसर प्रदान किया जाए।
उन्होंने कहा कि छात्रों का भविष्य किसी भी सरकार के लिए सर्वाेच्च प्राथमिकता होना चाहिए। सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि विद्यार्थी ही देश और प्रदेश का भविष्य हैं। केवल एक क्वालीफाइंग परीक्षा के नाम पर उन्हें सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा, आर्थिक बोझ और मानसिक प्रताड़ना झेलने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है। सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए छात्र हित में संवेदनशीलता के साथ तत्काल कदम उठाने चाहिए।


