•मझवां ब्लॉक के अस्पताल में गंदगी का अंबार, पानी की टंकी जर्जर, एक्सपायरी दवाएं फेंकी मिलीं – ग्रामीणों में आक्रोश।
रिपोर्ट: मनोज अग्रहरि
मीरजापुर/मझवां। सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों की पोल मझवां ब्लॉक के सेमरी गांव में खुलती दिख रही है। यहां का आयुष्मान आरोग्य मंदिर देखकर लगता है कि सरकार ने इलाज की व्यवस्था नहीं, बल्कि सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए भवन तैयार कर दिया है। भवन खड़ा है, ट्रांसफार्मर खड़ा है, पानी की टंकी भी खड़ी है, बस मरीजों के इलाज की व्यवस्था ही खड़ी नहीं हो पा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जिस कमरे में डॉक्टर की कुर्सी होनी चाहिए, वहां आवारा कुत्ते चैन की नींद सो रहे हैं। कई सालों से कमरों में गंदगी का डेरा है। फर्श पर कूड़ा, ईंट-पत्थर और दवाओं के पत्ते बिखरे पड़े हैं। पानी की टंकी ऐसी जर्जर हो चुकी है कि देखकर लगता है पानी नहीं, सिर्फ सरकारी उम्मीद जमा है। ट्रांसफार्मर भी मौजूद है, लेकिन बिजली की रोशनी शायद किसी दूसरी योजना में चली गई है। शौचालय और साफ-सफाई का हाल भी पूरी व्यवस्था को आईना दिखा रहा है।
वीडियो में अस्पताल परिसर में एक्सपायरी दवाएं जमीन पर फेंकी हुई भी दिखाई दे रही हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि अगर दवा एक्सपायर हुई तो उसे नियमानुसार वापस होना चाहिए था, फेंका क्यों गया?
देखरेख के अभाव में भवन अब धीरे-धीरे जर्जर होने लगा है। दीवारों पर सीलन, टूटी खिड़कियां और घास-फूस उगी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह आरोग्य मंदिर मानो कह रहा हो – “साहब, भाषणों में हमें 24 घंटे स्वस्थ रखिए, कभी हकीकत में भी हमारी तबीयत पूछ लीजिए।”
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि केंद्र पर तत्काल डॉक्टर, बिजली, पानी, सफाई और जरूरी दवाओं की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि गरीब ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना न पड़े।


