•मंडहोल में अवामी एक्शन कमेटी का धरना, सरदार अमान खान ने पाकिस्तान सरकार पर लगाए भेदभाव के आरोप
मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच अब नियंत्रण रेखा (एलओसी) को लेकर भी आवाज तेज होने लगी है। शनिवार को एलओसी से करीब सात किलोमीटर दूर मंडहोल गांव में अवामी एक्शन कमेटी की ओर से एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया। आयोजकों ने इसमें करीब 25 हजार लोगों के शामिल होने का दावा किया, हालांकि इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है।
धरने को संबोधित करते हुए अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख नेताओं में शामिल सरदार अमान खान ने राशन संकट, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य स्थानीय समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से पीओके और जम्मू-कश्मीर के बीच नियंत्रण रेखा को समाप्त कर आवागमन के रास्ते खोलने को लेकर राय मांगी। आयोजकों के मुताबिक, लोगों ने इस मांग का समर्थन किया।
अमान खान ने कहा कि नियंत्रण रेखा के दोनों ओर रहने वाले लोगों के बीच लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। उन्होंने पुंछ और मेंढर के रास्ते खोलने तथा एलओसी के नजदीक प्रदर्शन करने को लेकर भी लोगों की राय मांगी। उनके अनुसार, सभा में मौजूद लोगों ने इन मांगों के समर्थन में आवाज उठाई।
राशन संकट और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा भी उठा
धरने में पीओके में कथित राशन संकट, बिजली की कीमतों, बेरोजगारी और आवश्यक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। अमान खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की ओर से आवश्यक खाद्य सामग्री की आपूर्ति प्रभावित होने से स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि पहले पीओके के लोग जम्मू-कश्मीर के मेंढर क्षेत्र से जरूरी सामान खरीदकर लाते थे, लेकिन एलओसी पर लगी बाड़ और आवाजाही संबंधी पाबंदियों के कारण यह रास्ता बंद हो गया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए लोगों के अधिकारों और आवागमन की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
पाकिस्तान सरकार और सेना पर लगाए आरोप
अमान खान ने पाकिस्तान सरकार और प्रशासन पर पीओके के लोगों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान को पीओके के साथ किसी तरह का समझौता करना है तो क्षेत्र के लोगों के साथ पड़ोसी की तरह व्यवहार करना चाहिए।
उन्होंने पाकिस्तान की सेना पर भी जमीन और संसाधनों पर नियंत्रण रखने के गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों पर पाकिस्तान सरकार या सेना की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं हो सकी है।
पीओके में बिजली, आवश्यक वस्तुओं, रोजगार, शासन और सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर विरोध-प्रदर्शन पहले भी होते रहे हैं। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी की ओर से पिछले वर्षों में सब्सिडी, बेहतर सार्वजनिक सेवाओं और शासन में सुधार समेत विभिन्न मांगें उठाई जाती रही हैं।
विधानसभा चुनाव और स्थानीय सरकार पर भी सवाल
सभा में पीओके विधानसभा चुनाव का मुद्दा भी उठाया गया। अमान खान ने दावा किया कि कुल 45 विधानसभा सीटों में से पुंछ और सुधनौती जिलों की सात सीटों पर विरोध के कारण मतदान नहीं हो सका, जबकि 38 सीटों पर चुनाव कराया गया। हालांकि, मतदान से संबंधित इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री के आधार पर नहीं हो सकी है।
उन्होंने मुजफ्फराबाद स्थित पीओके की स्थानीय सरकार पर भी आरोप लगाए। उनका दावा था कि स्थानीय सरकार पाकिस्तान की सेना के दबाव में काम करती है और लोगों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम नहीं है।
धरने के दौरान हालिया विरोध-प्रदर्शनों में हुई हिंसा और लोगों की मौत का मुद्दा भी उठाया गया। पीओके में इस वर्ष हुए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं, हालांकि मृतकों की संख्या और घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं।
पाकिस्तान से अलग होने की मांग भी उठी
धरने के अंत में अमान खान ने पीओके के भविष्य को लेकर पाकिस्तान से अलग होने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की कई पीढ़ियां लंबे समय से पाकिस्तान के नियंत्रण में रह रही हैं और वास्तविक विकास तथा खुशहाली के लिए व्यवस्था में बड़े बदलाव की आवश्यकता है।
पीओके में शुरू हुआ आंदोलन मुख्य रूप से महंगाई, बिजली दरों, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता, बेरोजगारी और शासन से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहा है। हालांकि, समय के साथ आंदोलन के कुछ नेताओं ने राजनीतिक अधिकारों और पाकिस्तान के नियंत्रण पर भी सवाल उठाने शुरू किए हैं।
मंडहोल में हुए इस धरने में नियंत्रण रेखा समाप्त करने और जम्मू-कश्मीर के पुंछ तथा मेंढर से रास्ते खोलने की मांग का उठना आंदोलन के मुद्दों के विस्तार का संकेत माना जा रहा है। अमान खान ने कहा कि क्षेत्र में लोगों के अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर विरोध आगे भी जारी रहेगा।


