श्रीराम कथा में सीता स्वयंवर व परशुराम-लक्ष्मण संवाद सुनाते हुए बोले- कथाव्यास विजय कौशल महाराज।
रिपोर्ट: संजय त्रिपाठी।
सिद्धार्थनगर::डुमरियागंज विधान सभा क्षेत्र के सेमरहना में आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन आज रविवार को पूज्य संत विजय कौशल जी महाराज के मुखारविंद से श्रीराम कथा में सीता स्वयंवर और परशुराम–लक्ष्मण संवाद की भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। उन्होंने प्रभु श्रीराम के विनम्र आचरण का व्याख्यान करते हुए कहा कि विनम्रता सबसे बडा धन है, जिससे सब कुछ पाया जा सकता है।

कथाव्यास ने कहा, किसी भी घर में कन्या का जन्म सौभाग्य से होता है और कन्या स्वयं सौभाग्यशाली होती है। उन्होंने जनकपुरी में शिव धनुष टूटने के प्रसंग का अत्यंत भावनात्मक चित्रण करते हुए कहा कि जब भगवान श्रीराम ने सहजता से धनुष उठाकर तोड़ दिया तब माता सीता ने प्रभु के गले में जयमाल डालकर “अयोध्या और मिथिला के मंगल मिलन” की पावन बेला आरंभ की।
इसके बाद चारों भाइयों, राम- लक्ष्मण- भरत और शत्रुघ्न का विवाह जनकपुरी की चारों राजकुमारियों के साथ हुआ। कथा वाचक ने वर–वधु पक्ष के बीच हुईं मनोरम अठखेलियों का ऐसा वर्णन किया कि समूचा पंडाल “जय श्रीराम” के उद्घोषों से गूंज उठा।
सेमरहना में श्रीराम कथा पंडाल श्रद्धा, भक्ति व उल्लास का संगम बन गया है। यहां श्रद्धालु आस्था के गोते लगाते हुए आनंद के मोती चुन रहे हैं। “जय श्रीराम” के उद्घोषों से गूंजायन हो रहा कथा पंडाल में विजय कौशल जी महाराज ने प्रवचन के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया कि विनम्रता, संयम और भक्ति ही जीवन का सच्चा धन है। कथा के उपरांत श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया
इस अवसर पर मुख्य यजमान श्रीमती इंद्रावती सिंह, जिला पंचायत अध्य्क्ष श्रीमती शीतल सिंह, जिला पंचायत अध्य्क्ष प्रतिनिधि उपेंद्र प्रताप सिंह, शिवेंद्र प्रताप सिंह राहुल सिंह सच्चिदानंद पांडे एवं भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।


