•पत्नी और तीन बच्चियों की मौत के मामले में अदालत ने माना आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी, 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।
रिपोर्ट:: मयंक त्रिपाठी।
औरैया। तीन बेटियों के जन्म पर पत्नी को प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए विवश करने के मामले में अदालत ने पति को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कैलाश कुमार ने शुक्रवार को सुनाए फैसले में दोषी पति कुलदीप पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला दिबियापुर थाना क्षेत्र के ग्राम सैहदपुर का है। एक नवंबर 2020 को साधना और उसकी तीन बेटियों गुंजन (सात वर्ष), अंजुम (तीन वर्ष) तथा 15 दिन की नवजात बच्ची के शव घर में फांसी के फंदे पर लटके मिले थे। घटना से इलाके में सनसनी फैल गई थी।
मृतका के भाई बृजपाल सिंह निवासी अलायपुर थाना सहार ने दिबियापुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि साधना की शादी करीब दस वर्ष पहले कुलदीप से हुई थी। तीन बेटियों के जन्म के बाद से ही पति उसे ताने देकर प्रताड़ित करता था। 15 दिन पहले तीसरी बेटी के जन्म के बाद उत्पीड़न और बढ़ गया था। इससे परेशान होकर साधना ने अपनी तीनों बेटियों के साथ आत्महत्या कर ली।
पुलिस ने विवेचना के बाद पति कुलदीप को आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करने का आरोपी मानते हुए न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी अरविंद राजपूत ने चार लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार मानते हुए अभियुक्त को कठोर सजा देने की मांग की। वहीं बचाव पक्ष ने अभियुक्त की उम्र और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए सजा में नरमी बरतने की अपील की।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कुलदीप को आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करने का दोषी माना। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि एक ही घर में पत्नी और तीनों बेटियों के शव फांसी पर लटके मिलने की परिस्थितियों को लेकर अभियुक्त कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। अदालत ने उसे सात वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया।

