रिपोर्ट: संजय त्रिपाठी।
सिद्धार्थनगर:: डुमरियागंज विधानसभा के सेमरहना में सप्त दिवसीय राम कथा के आज चौथे दिन की कथा में विजय कौशल जी महाराज ने श्रीराम कथा की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि संत के हृदय की सेवा करना ही सरोवर में स्नान करना है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम ज्ञान और जानकी जी भक्ति की प्रतीक है। ज्ञान वृक्ष के समान कठोर होता है, जबकि भक्ति लता के समान सुकुमार होती है। महापुरुषों की कोई जाति धर्म नहीं होता।
महापुरुष किसी जाति विशेष की धरोहर नहीं होते वह संपूर्ण समाज के होते हैं।
यहां कथा व्यास ने कहा कि महापुरुषाें की कोई भी जाति नहीं होती। न भगवान राम क्षत्रिय थे और न परशुराम जी ब्राह्मण। वे तो महापुरुष, ब्रह्म अवतार थे। सृष्टि के भगवान को जाति की राजनीति में बांधना अपराध है। इसके बाद परशुराम जी द्वारा श्रीराम की स्तुति और फिर माता जानकी का अलौकिक दिव्य श्रंगार। माता सुनयना और राजा जनक के भाग्य की महिमा अपरंपार क्योंकि स्वयं जगत जननी उनकी गोद में बड़ी हुईं और ब्रह्म उनके जमाई बनने जा रहे हैं। इसके बाद बखान हुआ प्रभु राम सहित चारों भाइयों की बरात निकासी का। जिसकी सजीव झांकी मिथिला नगरी बनी रामनगर कॉलोनी में हुई, जब रथ पर बैठकर चारों भाइयों के स्वरूप निकले। श्रद्धालु गाने लगे आज मिथिला नगरिया निहाल सखी रे, चारों दूल्हा में बड़का कमाल सखी रे..। सकुचाती वैदेही हरी साड़ी में अपनी बहनों और सखियों संग भांवरों के लिए पधारीं। एक ओर कथा प्रसंग और दूसरी ओर सीया रघुवर जी के संग परन लागी हरे− हरे…गीत पर झूमते श्रद्धालु थे। वहीं कथा व्यास संत विजय कौशल जी ने जनक पुर की महिमा का भी अद्भुत वर्णन किया। कहा कि जनकपुर की महिमा बखानी नहीं जाती, उपमा नहीं दी जाती। दिव्यता से परिपूर्ण दुल्हन की भांति श्रंगारित मिथिला नगरी और एक जैसे रूप में सुशाेभित होते चारों भाई और दोनों समधि। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीहरि विष्णु के सभी अवतारों में विवाह सिर्फ श्रीराम अवतार में ही हुआ, इसलिए उनके विवाह के हर संस्कार की महिमा दिव्य ही है। बड़हार के प्रसंग के बाद आरती के साथ चौथे दिन के कथा प्रसंग का समापन हुआ।
कथा के उपरांत श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया
इस अवसर पर मुख्य यजमान श्रीमती इंद्रावती सिंह, जिला पंचायत अध्य्क्ष श्रीमती शीतल सिंह, जिला पंचायत अध्य्क्ष प्रतिनिधि उपेंद्र प्रताप सिंह, शिवेंद्र प्रताप सिंह राहुल सिंह एवं भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।


