रिपोर्ट : संजय त्रिपाठी।
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र के सेमरहना में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के अंतिम दिन गुरुवार को रावण वध और भगवान श्रीराम के राजतिलक के प्रसंग सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा वाचक विजय कौशल जी महराज ने संगीतमय चौपाइयों के माध्यम से लंका विजय से लेकर भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी तक के प्रसंगों का वर्णन किया। रावण वध के दौरान पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।

कथाव्यास ने बताया कि भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने का समाचार मिलते ही नगर में उत्सव छा गया। भरत सहित अयोध्यावासी उनके स्वागत के लिए आतुर थे। भगवान श्रीराम के राजतिलक का प्रसंग सुन श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए।
बधाई भजनों की प्रस्तुति से कथा स्थल भक्तिमय हो उठा।
कथा व्यास ने कहा कि शरीर यहीं छूट जाता है और जीवात्मा अपने साथ अपने अच्छे और बुरे कर्म लेकर जाती है। इसलिए अंतिम समय के भय से मुक्त होने का एकमात्र उपाय भगवद-भक्ति और सत्संग है।
महराज जी ने आगे कहा कीमहाराज जी अक्सर बताते हैं कि मनुष्य जीवन का असली लाभ तभी है जब व्यक्ति जीते-जी भगवान का नाम जपे। अंतिम समय में मन की स्थिति वैसी ही होती है जैसी वह पूरे जीवन भर अभ्यास करता है
विजय कौशल जी महाराज के भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। सप्त दिवसीय कथा के समापन पर श्रीरामायण जी की आरती की गई। इसके बाद हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
आयोजन कर्ता जिला पंचायत अध्य्क्ष प्रतिनिधि उपेंद्र प्रताप सिंह ने सभी आये हुए श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया एवं आयोजन को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शीतल सिंह, सच्चिदानंद पाण्डेय, राहुल सिंह, विनय पाठक, विक्कू सिंह सिकटा, सुनील मिश्र सहित काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।


