-धान की बालियां जमीन पर बिछीं, खेतों में पानी; किसान के सामने छह महीने की मेहनत बचाने की चुनौती
रिपोर्ट: मयंक त्रिपाठी।
औरैया। सितंबर का महीना किसान के लिए सिर्फ कैलेंडर का एक पन्ना नहीं होता। यह वह वक्त है जब खेतों में खड़ी धान की फसल देखकर किसान अपने परिवार के भविष्य के सपने बुनता है। किसी को बेटी की शादी करनी है, किसी को बेटे की फीस भरनी है, किसी को कर्ज चुकाना है तो किसी को घर की मरम्मत करानी है। लेकिन सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम की बदली करवट ने औरैया के किसानों की इन उम्मीदों पर पानी फेरने का खतरा पैदा कर दिया है।
जिले में पिछले दिनों से जारी बारिश और तेज हवा ने खेती-किसानी की चिंता बढ़ा दी है। कई क्षेत्रों में खेतों में पानी भर गया है तो कहीं धान की खड़ी फसल हवा और बारिश के कारण जमीन पर बिछ गई है। सहार क्षेत्र के नौगवां ग्राम पंचायत के मजरा पुरवा महिपाल में लगातार बारिश के कारण धान, बाजरा, तिल और सब्जियों के खेतों में पानी भरने की रिपोर्ट सामने आई है। ग्रामीणों ने फसल और मकानों के नुकसान का सर्वे कराने की मांग भी उठाई है। बिधूना क्षेत्र के कई गांव में भी बारिश से किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।
कटाई से पहले खेत में बिछ गई उम्मीद
किसान ने महीनों तक धान की फसल को सींचा। खाद डाली, निराई-गुड़ाई की, कीटों से बचाया और हर मौसम की मार झेली। अब जब फसल पकने की ओर बढ़ रही थी और कटाई की तैयारी की उम्मीद थी, तभी बारिश और हवा ने संकट खड़ा कर दिया।
धान की फसल जमीन पर गिरने से कटाई मुश्किल होती है। लगातार नमी रहने से दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने, फसल में सड़न और उत्पादन घटने का खतरा रहता है। स्थानीय रिपोर्टों में भी औरैया के बिधूना क्षेत्र में तेज हवा और बारिश से धान के खेतों के गिरने तथा बाजरा, तिल और सब्जी की फसलों पर असर की बात सामने आई है।
किसान शैलेंद्र सिंह के अनुसार, उनकी दस बीघा धान की फसल बारिश के कारण खेत में गिर गई। वहीं किसानों ने तिल, बाजरा और बागवानी वाली फसलों को भी नुकसान की आशंका जताई है। कृषि विभाग ने किसानों को खेतों में जलनिकासी दुरुस्त रखने और बीमित फसल के नुकसान की सूचना देने की सलाह दी है।
खेत में पानी, अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित
मुसीबत केवल खड़ी फसल तक सीमित नहीं है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है। जिस जमीन पर किसान अगले सीजन की फसल की तैयारी करना चाहता है, वही खेत अभी पानी से लबालब हैं।
औरैया के ग्रामीण इलाकों में लगातार बारिश से रास्तों और निचले इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बनी है। सहार क्षेत्र में रास्तों के डूबने और कच्चे मकानों के क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
बारिश चाहिए, लेकिन फसल के हिसाब से
किसान बारिश का विरोध नहीं करता। पानी उसके खेत और फसल के लिए जीवन है। समस्या तब पैदा होती है जब बारिश फसल की जरूरत से ज्यादा और गलत समय पर होने लगे।
कुछ दिन पहले तक किसान सिंचाई के लिए पानी को लेकर परेशान था। 24 सितंबर को धुपकरी माइनर में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने को लेकर किसानों ने धरना भी दिया था। अब अचानक हुई लगातार बारिश ने तस्वीर ही बदल दी है।
यही बदलता मौसम किसान की सबसे बड़ी चिंता बनता जा रहा है—कभी पानी की कमी और कभी पानी की अधिकता।
शहर में जलभराव परेशानी, गांव में पूरी कमाई का सवाल
शहर में बारिश से सड़क पर पानी भरता है तो लोग कुछ देर बाद रास्ता बदल लेते हैं। लेकिन किसान के सामने ऐसा कोई दूसरा रास्ता नहीं होता। उसकी जमीन वहीं है और उसकी फसल भी वहीं।
खेत में पानी भरने का मतलब सिर्फ कुछ घंटों की परेशानी नहीं है। इसके पीछे बीज, खाद, डीजल, मजदूरी और सिंचाई पर खर्च हुई पूरी पूंजी होती है। फसल खराब होने पर किसान के सामने अगली फसल की लागत जुटाने का सवाल भी खड़ा हो जाता है।
एक किसान की फसल प्रभावित होती है तो उसका असर गांव की पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। खेतिहर मजदूरों का काम, ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी का इस्तेमाल, खाद-बीज की बिक्री और स्थानीय बाजार का कारोबार सब इससे जुड़े हैं।
अब खेत तक पहुंचना होगा प्रशासन को
मौसम की मार के बीच सबसे जरूरी है कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का वास्तविक सर्वे कराया जाए। बारिश थमने के बाद अधिकारी खेतों तक पहुंचें और नुकसान का आकलन करें। किसानों को जलनिकासी, फसल बचाव और कटाई को लेकर कृषि विशेषज्ञों की सलाह मिले।
जहां फसल बीमा है, वहां किसानों को दावा प्रक्रिया की जानकारी और सहायता उपलब्ध कराई जाए। जिन किसानों की फसल वास्तव में खराब हुई है, उन्हें नियमानुसार राहत और क्षतिपूर्ति दिलाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच प्रशासन को ग्रामीण इलाकों में जलभराव, कच्चे मकानों, बिजली व्यवस्था और पशुधन की सुरक्षा पर भी नजर रखनी होगी। 26 सितंबर को भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी के बीच औरैया में स्कूलों की छुट्टी भी घोषित की गई है।
किसान की चिंता सिर्फ आज की नहीं
सितंबर की यह बारिश गुजर जाएगी। बादल छंटेंगे और खेतों से पानी भी उतर जाएगा। लेकिन जिस किसान की तैयार फसल प्रभावित हुई है, उसके लिए संकट इतनी जल्दी खत्म नहीं होगा।
धान की एक-एक बाली में उसके परिवार की जरूरतें जुड़ी हैं। फसल मंडी तक पहुंचती तो उससे घर का खर्च चलता, कर्ज चुकता होता और बच्चों की पढ़ाई आगे बढ़ती। अब वही फसल खेत में पानी और कीचड़ के बीच किसान की चिंता बन गई है। किसान प्रकृति से लड़ना नहीं चाहता। वह सिर्फ इतना चाहता है कि मौसम की मार के बाद उसका हाथ खाली न रह जाए। आज सवाल सिर्फ यह नहीं कि औरैया में कितनी बारिश हुई। सवाल यह है कि इस बारिश से खेत में खड़ी फसल का कितना नुकसान हुआ और उस नुकसान की भरपाई किसान तक कितनी जल्दी पहुंचती है।आसमान जब बरसता है तो धरती हरी होती है, लेकिन जब बारिश अपनी सीमा भूल जाती है तो वही पानी किसान की महीनों की मेहनत को बहा ले जाने लगता है। ऐसे में अब प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ जलभराव से निपटने की नहीं, बल्कि किसान की फसल और उसके भरोसे को बचाने की भी है।


