मथुरा/बरसाना। ब्रजभूमि ने अपना एक महान संत, गौ-रक्षक और पर्यावरण पुरोधा खो दिया। बरसाना के ब्रह्मांचल पर्वत पर स्थित मान मंदिर के संस्थापक, बरसाना ब्रज के युग पुरुष पद्मश्री रमेश बाबा जी महाराज (90 वर्ष) का 06 अक्टूबर 2026 को मान मंदिर आश्रम, गहवरवन में गोलोक गमन हो गया। उनके निधन से पूरे ब्रजमंडल में शोक की लहर है।
इस दुःखद घड़ी पर मथुरा के प्रमुख उद्योगपति एवं समाजसेवी *शेखर अग्रवाल व राम अग्रवाल, श्री ग्रुप परिवार, मथुरा* ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
पद्मश्री रमेश बाबा जी ने क्या-क्या किया – एक युग पुरुष की अमर गाथा:
1. जन्म और ब्रज आगमन: पूज्य बाबा का जन्म 1938 में तीर्थराज प्रयागराज में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य बलदेव प्रसाद शुक्ल के घर हुआ था। मात्र 14-15 वर्ष की आयु में वैराग्य लेकर 1953-54 में वे ब्रज आ गए और फिर जीवन भर ब्रज की सीमा से बाहर नहीं गए। उन्होंने ब्रज को ही अपनी कर्मभूमि बना लिया।
2. मान मंदिर की स्थापना: बरसाना के ब्रह्मांचल पर्वत पर जहाँ कभी डाकुओं का राज था, वहाँ उन्होंने मान मंदिर आश्रम की स्थापना की और गहवरवन में दशकों तक साधना की।
3. एशिया की सबसे बड़ी गौशाला – माताजी गौशाला: वर्ष 2007 में केवल 2 गौवंश से शुरू की गई माताजी गौशाला आज 40 से 65 हजार निराश्रित, बीमार और वृद्ध गौवंश की सेवा कर रही है। बिना किसी सरकारी अनुदान के चलने वाली यह गौशाला आज विश्व की सबसे बड़ी गौशालाओं में गिनी जाती है।
4. ब्रज के पर्वतों और वनों की रक्षा: ब्रज की कृष्णकालीन पवित्र पहाड़ियों में हो रहे अवैध खनन और गहवरवन में पेड़ों की कटाई के खिलाफ उन्होंने ऐतिहासिक आंदोलन चलाया। उनके अथक संघर्ष के परिणामस्वरूप सुप्रीम कोर्ट ने 2008 में ब्रज की पहाड़ियों में खनन पर रोक लगाई और 5253 हेक्टेयर भू-भाग को खनन मुक्त कर आरक्षित वन घोषित किया गया।
5. प्राचीन कुंडों का जीर्णोद्धार: रत्न कुंड, विह्वल कुंड, कृष्ण कुंड, गोपाल कुंड, ललिता कुंड, रुद्र कुंड सहित ब्रज के दर्जनों प्राचीन कुंडों और सरोवरों का जीर्णोद्धार उनके प्रयासों से हुआ।
6. यमुना मुक्ति आंदोलन: पवित्र यमुना जी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए उन्होंने मान मंदिर सेवा संस्थान के माध्यम से 2011 में इलाहाबाद संगम से दिल्ली के जंतर-मंतर तक पदयात्रा और आंदोलन चलाए।
7. 84 कोस ब्रज यात्रा और हरिनाम प्रचार: उन्होंने निःशुल्क राधारानी ब्रज यात्रा (84 कोस यात्रा) शुरू की और गाँव-गाँव में हरिनाम संकीर्तन का प्रचार किया।
8. पद्मश्री सम्मान: गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण में अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने 2019 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। ब्रज से बाहर न जाने के संकल्प के कारण वे दिल्ली नहीं गए, बल्कि जिला प्रशासन द्वारा बरसाना आकर उन्हें यह सम्मान सौंपा गया। aceb
शेखर अग्रवाल जी ने कहा:
“पूज्य रमेश बाबा जी महाराज का जाना ब्रज के लिए अपूरणीय क्षति है। वे केवल संत नहीं, बल्कि ब्रज के पर्यावरण, गौ माता और संस्कृति के सच्चे रक्षक थे। उन्होंने जो माताजी गौशाला बनाई, वह आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है। उनका जीवन त्याग, तपस्या और सेवा का प्रतीक था। श्री ग्रुप परिवार उन्हें कोटि-कोटि नमन करता है।”
राम अग्रवाल जी ने कहा- “रमेश बाबा जी ने ब्रज की पहाड़ियों, यमुना जी और गौवंश के लिए जो लड़ाई लड़ी, वह इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी। उन्होंने बिना किसी स्वार्थ के 70 वर्षों तक ब्रज की सेवा की। हम सभी मथुरा वासियों को उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए। ईश्वर उनकी दिव्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें। ॐ शांति।” अंतिम संस्कार 07 अक्टूबर को गहवरवन में किया गया, जहाँ हजारों भक्तों ने नम आँखों से उन्हें विदाई दी।


